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ब्रज की होली में आस्था का रंग, ठाकुरजी के चरणों में चढ़े फूलों से बन रहा गुलाल

-5 कुंतल स्पेशल गुलाल की होगी ऑनलाइन बिक्री

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मथुरा

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Amit Sharma

Feb 10, 2020

ब्रज की होली में आस्था का रंग, ठाकुरजी के चरणों में चढ़े फूलों से बन रहा गुलाल

ब्रज की होली में आस्था का रंग, ठाकुरजी के चरणों में चढ़े फूलों से बन रहा गुलाल

मथुरा। होली पर अबीर-गुलाल का इस्तेमाल तो हर कोई करता है लेकिन जब ये गुलाल ठाकुरजी के चरणों में अर्पित किए गए फूलों से बना हो तो लोगों की आस्था इन रंग या गुलाल में और भी प्रगाढ़ हो जाती है। धर्मनगरी की होली इस बार भी बांके बिहारी के चरणों में चढ़े फूलों से रंगीन होगी।

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ब्रज गंधा प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा गुलाल
वृन्दावन के चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन में रह रहीं निराश्रित माताएं गुलाल बनाने में जुटी हैं। ब्रजगंधा प्रसाद समिति के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर विक्रम शिवपुरी ने बताया कि अपनी सुविधा के अनुसार यहां रह रहीं माताएं समय निकाल कर फूलों से हर्बल गुलाल तैयार करने में जुटी हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी अनुराग श्याम रस्तोगी ने बताया कि मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से गुलाल और अगरबत्ती बनाने का काम पिछले वर्ष शुरू किया गया था। पिछले साल होली पर करीब एक क्विंटल गुलाल बनाकर करीब एक लाख रुपए का बिक्री किया गया था और इसकी बढ़ती डिमांड को देखते हुए इस बार करीब 4-5 क्विंटल गुलाल तैयार किया जा रहा है।

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फूल बंगला उत्सव में आता है सर्वाधिक फूल
ब्रजगंधा प्रसाद समिति के प्रोडक्ट कॉर्डिनेटर विक्रम शिवपुरी ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर में चढ़ने वाला फूल सबसे ज्यादा फूल बंगलों के दौरान आता है। इस दौरान प्रतिदिन करीब 40-50 किलो फूल आते हैं। उन्होंने बताया कि चढ़ावे के फूलों की सबसे पहले सफाई होती है, बाद छंटाई का काम होता है। फूलों को सुखाया जाता है और फिर पीसकर उनका पाउडर तैयार करके रख लिया जाता है। इस पाउडर का इस्तेमाल अगरबत्ती बनाने में भी होता है लेकिन होली पर इससे गुलाल तैयार किया जाता है। इस बार 4-5 क्विंटल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

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गुलाल बनाने का मिलता है मेहनताना
सरकार की ओर से तो यहां रह रही निराश्रित माताओं को पेंशन मिलती ही है लेकिन अगरबत्ती और गुलाल बनाने के एवज में भी इन महिलाओं को इनके काम के समय के मुताबिक पारिश्रमिक दिया जाता है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि चैतन्य विहार आश्रय सदन में करीब 230 महिलाएं रह रही हैं लेकिन इन दिनों चल रहे गुलाल बनाने के काम में वे अपनी सुविधा और समय के अनुसार ही काम करती हैं। समय के हिसाब से उन्हें बाकायदा इसके लिए पारिश्रमिक भी दिया जाता है। डीपीओ ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले वृद्ध माताओं को कम मेहनत कर आजीविका के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराने की सोच के साथ इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है।