
मथुरा। मुखरई में चरकुला नृत्य की धूम देखने को मिली। यहां महिलाएं अपने सर पर चरकुला रखकर नृत्य करती हैं और वर्षों से चली आ रही परम्परा को अभी तक निभाती चली आ रही हैं। इस चरकुला नृत्य को देखने के लिए देश के कौने-कौने से लोग आते हैं और इस नृत्य का आनंद लेते हैं।
ये है मान्यता
ब्रज की अष्ठिधात्री देवी राधारानी के जन्म से जुड़ा है चरकुला नृत्य का इतिहास। मुखराई गांव में ब्रज के कलाकारों द्वारा फूलों की होली के साथ चरकुला नृत्य का आयोजन बड़े ही हर्षोउल्लास के किया जा रहा है। वहीं इस दिव्य आयोजन को देखने के लिए राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारिओं सहित देश विदेश से लोग गांव मुखराई पहुचते हैं। मान्यता के अनुसार धूल होली के दूसरे दिन इस चरकुला नृत्य का आयोजन ग्राम वासियों द्वारा किया जाता है। माना जाता है कि मुखराई गांव राधारानी का ननिहाल है। जहां आज से लगभग पांच हज़ार वर्ष पूर्व राधारानी की नानी मुखरा देवी ने राधा रानी के जन्म की ख़ुशी में रथ के पहिये पर 108 दीपक रख कर नृत्य किया था वही परम्परा का निर्वाह यहां कि महिलायें वर्षों से करती चली आ रही हैं।
देश विदेश से नृत्य को देखने आते हैं लोग
बताया जा रहा है कि इस चरकुला में 51 किलो वजन होता है। जिस पर 108 दीपक रख कर गांव की महिलायें बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ 51 किलो बजनी चरकुला को सर पर रख कर नृत्य करती हैं और इन्हें वजन का कोई आभाष भी नहीं होता है। नगाड़ों की धुन पर ये महिलायें राधारानी की भक्ति में लीन हो नृत्य करती हैं। इस अलौकिक नृत्य को देखने के लिए देश विदेश से लोग राधारानी की ननिहाल मुखराई आते हैं।
Published on:
04 Mar 2018 03:31 pm

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