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Panipat Movie का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों से पुलिस की नोकझोंक

मथुरा में भी फिल्म पानीपत का विरोध प्रदर्शन जगह-जगह किया गया साथ ही ज्ञापन देने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे जाट समाज के लोगों से पुलिस की नोकझोंक हो गई।

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मथुरा

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Amit Sharma

Dec 09, 2019

Panipat Movie का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों से पुलिस की नोकझोंक

Panipat Movie का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों से पुलिस की नोकझोंक

मथुरा। देशभर में फिल्म पानीपत panipat को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। फिल्म निर्देशक के जगह-जगह पुतले फूंके जा रहे हैं और फिल्म को रिलीज न करने की जाट समाज के लोग मांग कर रहे हैं। वहीं मथुरा में भी फिल्म पानीपत का विरोध प्रदर्शन जगह-जगह किया गया साथ ही ज्ञापन देने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे जाट समाज के लोगों से पुलिस की नोकझोंक हो गई।

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फिल्म पानीपत के रिलीज होने के बाद देशभर में जाट समाज के लोगों के द्वारा फिल्म पानीपत का विरोध किया जा रहा है। सोमवार को मथुरा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाट समाज के लोगों के द्वारा फिल्म पानीपत का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। मथुरा में जिला अधिकारी को पानीपत फिल्म के विरोध में ज्ञापन देने पहुंचे जाट समाज के लोगों को पुलिस की नोकझोंक का सामना करना पड़ा और उन्हें जिला अधिकारी से बगैर मिले ही वापस लौटना पड़ा।

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जाट समाज के लोगों ने कहा कि फ़िल्म में महाराजा सूरजमल के चरित्र को गलत ढ़ंग से दिखाया गया है। जिससे देश में जाट कौम में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। तोमर ने कहा कि फ़िल्म निर्माता और निर्देशक ने ऐतिहासिक तत्वों से छेड़छाड़ करके महाराजा सूरजमल जैसे महापुरुष का गलत ढंग से चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में जाट कौम में भारी आक्रोश और गुस्सा है इसलिए फ़िल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जिला अधिकारी मथुरा को ज्ञापन देने पहुंचे जाट समाज के लोगों से हुई अभद्रता के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर जेएस जाट ने बताया हम लोग शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने आए थे लेकिन पुलिस ने हमसे बदसलूकी की और हमें गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी दी।

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वहीं किसान यूनियन के प्रवक्ता रामवीर सिंह तोमर ने कहा कि पेशवा और मराठा जब पानीपत युद्ध हारकर लौट रहे थे तो महाराजा सूरजमल और महारानी किशोरी जी ने 6 माह तक मराठा सेना को पनाह दी थी। उनका इलाज कराया था, उनको रहने खाने का बंदोबस्त किया था। जबकि फ़िल्म में काल्पनिक बातें दिखाई गयीं हैं जो कि निंदनीय और बर्दाश्त से बाहर हैं।