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बाबा जय गुरुदेव के 212 अनुयायियों पर लूट और जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज करने का आदेश

-Jai gurudev धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष की पत्नी की याचिका पर फैसला।-20 नवंबर, 2018 का मामला, फेंसिग की बल्लियां लूट गए, जमीन पर कब्जा किया।-Police ने नहीं लिखी रिपोर्ट तो Bharatpur की सुषमा प्रताप ने ली Court की शरण।

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Jai Gurudev

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मथुरा। बाबा जयगुरुदेव (Baba jai gurudev) की चल-अचल संपत्ति का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसमें जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ ट्रस्टी की पत्नी की याचिका पर न्यायालय ने बाबा पंकज यादव (Baba pankaj yadav) के पिता सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ जमीन कब्जाने, लूट (Loot)आदि की धाराओं में थाना हाईवे (Thana Highway) को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

इनके खिलाफ हुआ आदेश पारित
हाईवे किनारे स्थित बाबा जयगुरुदेव के ब्रहमलीन होने के बाद उनकी हजारों करोड़ की चल-अचल संपत्ति को लेकर सड़क से लेकर उच्च न्यायालय तक कानूनी जंग छिड़ी हुई है। इसमें एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। ताजा मामला जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष एवं जय गुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट के ट्रस्टी रामप्रताप सिंह निवासी भरतपुर, राजस्थान की पत्नी सुषमा प्रताप सिंह ने न्यायालय में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 4 मथुरा अमित कुमार तिवारी ने आदेश पारित किया है। उन्होंने चरन सिंह यादव पुत्र श्रीकृष्ण यादव, जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था के कथित महामंत्री बाबूराम यादव, पंकज सिसौदिया पुत्र गोपाल सिसौदिया, अरुण यादव, अजय चौहान, राहुल यादव पुत्र विश्राम यादव, सुभाष पाल, विशाल यादव, चंदन पुत्र प्रदीप सभी निवासीगण जय गुरुदेव आश्रम, सुशील यादव पुत्र सुरेंद्र यादव, अनिल ठाकुर पुत्र चेत नारायण, रंजीत यादव निवासीगण साकेत कालोनी मथुरा के अलावा लगभग 200 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 434, 392, 504, 506, 120बी आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस कार्रवाई न होने पर ली न्यायालय की शरण
पीड़िता सुषमा प्रताप सिंह का आरोप है कि जय गुरुदेव आश्रम के निकट स्थित उसकी भूमि पर 20 नवंबर, 2018 को उपरोक्त नामदज सहित 200 लोग पहुँचे। यहाँ जमीन पर लगे कंटीले तार और बल्लियां की फेंसिंग को उखाड़कर लूट ले गए। साथ ही जमीन पर अपना दावा बताते हुए प्रार्थिया को फिर से यहाँ दिखाई देने पर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़िता ने एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन कोई पुलिस ने कुछ नहीं किया। इसके बाद कोर्ट की शरण ली। इस याचिका को अपर सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया। जिसे सत्र न्यायालय में रिवीजन के माध्यम से चुनौती दी गई। इस पर न्यायालय ने सुनवाई करते हुए सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश थाना हाईवे को दिए हैं।

ये बोले पीड़िता के वकील
पीड़िता के अधिवक्ता प्रदीप राजपूत ने पत्रिका को बताया कि स्थानीय लोगों की जमीनों पर कब्जा करने के आरोप लगते रहे हैं। कोर्ट ने 12 नामजदों एवं 200 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाना हाईवे पुलिस को विवेचना के आदेश दिए हैं।