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दानघाटी मंदिर गोवर्धन में हैरतभरा काम, दुखी हैं पुजारी

दानघाटी मंदिर वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण गोपियों से दूध-दही का दान लिया करते थे। मंदिर में इस समय सिक्कों के कारण बड़ी समस्या है।

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दानघाटी मंदिर में सिक्के

दानघाटी मंदिर में सिक्के

मथुरा। मथुरा से करीब 23 किलोमीटर दूर है गोवर्धन। इन्द्र के प्रकोप से बृजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाया था। यहीं पर दानघाटी मंदिर। यहीं से गोवर्धन पर्वत की श्रृंखला शुरू होती है। यह वह ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण गोपियों से दूध-दही आदि का दान लिया करते थे। इस दानघाटी मंदिर में इस समय सिक्के ही सिक्के हैं। इन सिक्कों को साफ करने और फिर रखने की समस्या है। यह हैरतभरा काम है। पुजारी भी दुखी हैं, लेकिन करें तो क्या?

नोटबंदी के बाद अधिक चढ़ाए जा रहे सिक्के

दानघाटी मंदिर में गोवर्धन पर्वत पर दूध के साथ सिक्के चढ़ाने का चलन पुराना है। जब से नोटबंदी हुई है, तब से सिक्के चढ़ाने वालों की संख्या अचानक ही बढ़ गई है। रोजाना हजारों सिक्के चढ़ाए जा रहे हैं। मुड़िया मेले के दौरान तो सिक्कों की मानो बाढ़ ही आ जाती है। फिर इन सिक्कों को एकत्रित करना, साफ करना और रखना बड़ी समस्या पैदा कर रहा है। सिक्कों को संभालने में कई लोग लगे रहते हैं।

सिक्के चढ़ाना मजबूरी

दानघाटी मंदिर में आए श्रद्धालु राम नारायण ने बताया कि सिक्के चढ़ाने की मजबूरी है। नोटबंदी के कारण रुपयों का लेन-देन कम हो गया है। हमें नहीं पता कि मंदिरों में ऑनलाइन दान लिया जाता है या नहीं। इस कारण सिक्के चढ़ा रहे हैं ताकि भगवान को खुश करके मनोवांछित फल पा सकें।

बैंक जमा नहीं कर रहे सिक्के

मंदिर के पुजारी रामेश्वर ने बताया कि लाखों सिक्के हो गए हैं। नोटबंदी के बाद सिक्के अधिक संख्या में चढ़ाए जा रहे हैं। इन सिक्कों को पानी से साफ किया जाता है। फिर पोंछकर रखा जाता है। उन्होंने कहा कि सिक्कों को बैंक अपने यहां जमा नहीं कर रहे हैं। इस कारण भी समस्या है। वैसे मंदिर में इतनी जगह है कि सिक्कों को बोरी में बंद करके रख देते हैं। पुजारी ने मांग की है कि सिक्कों को बैंक अपने यहां जमा करें। सिक्कों को जमा न करके बैंक भारतीय मुद्रा का अपमान कर रहे हैं। इस ओर कोई देखने वाला नहीं है।