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प्रसिद्ध रमणरेती आश्रम में 18 साल से हो रहा अवैध काम, किसी में भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं, देखें वीडियो

गोकुल-महावन के मध्य रमणरेती स्थित उदासीन कार्ष्णि आश्रम के सामने सरकारी नियम-कानूनों को ताक पर रख कर वर्षों से समानांतर चिड़ियाघर का संचालन किया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में दुर्लभ प्रजाति के हिरणों को रखा गया है।

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मथुरा। सत्ता जिस चौखट पर नतमस्तक होती हो, उसी सरकार के मातहत उसके खिलाफ कार्रवाई की हिमाकत कैसे कर सकेंगे। ऐसा ही एक मामला मथुरा में सामने आया है। गोकुल-महावन के मध्य रमणरेती स्थित उदासीन कार्ष्णि आश्रम के सामने सरकारी नियम-कानूनों को ताक पर रख कर वर्षों से समानांतर चिड़ियाघर का संचालन किया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में दुर्लभ प्रजाति के हिरणों को रखा गया है। वन विभाग के अधिकारी मूक बने बैठे हैं। करीब 18 साल से यहां बाडे़नुमा जगह में फेसिंग के बीच हिरणों की संख्या करीब 378 है। जिनमें काले हिरणों की संख्या करीब 57 है। यहां से इन हिरणों को सुरक्षित स्थान या किसी हिरण अभ्यारण्य में शिफ्ट कराने के लिए आदेश 19 सितंबर 2018 में ही जारी कर दिए गए थे, लेकिन अभी तक विभाग इन हिरणों के पुनर्वास के लिए स्थान का चयन नहीं कर सका है।

ये है मामला

बता दें कि वर्ष 2000-2002 के मध्य यमुना में बाढ़ आने पर कुछ हिरणों को रेस्क्यू कर तत्कालीन डीएम और डीएफओ के आदेश पर यहां रखा गया था। बकायदा इसके लिए आश्रम को प्रशासन ने जमीन भी आवंटित कर दी। वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत इन हिरणों का यहां से पुनर्वास कराने का खयाल विभागीय अधिकारियों को नहीं आया। अब इन हिरण की संख्या 378 पर पहुंच गई है। इसमें काले हिरनों की संख्या 57 है। इसके साथ ही इस पैररल जू में एक बंद जालीनुमा कठघरे में कबूतरों और खरगोश के साथ राष्ट्रीय पक्षी मोर को भी बंद कर रखा गया है। इस मामले को लेकर 19 सितंबर 2018 को वन संरक्षक आगरा मंडल जावेद अख्तर ने डीएफओ मथुरा से हिरणों की रिपोर्ट मांगने के साथ ही इन्हें सुरक्षित स्थान जैसे हिरण अभ्यारण्य में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी करीब सात महीने का समय बीत गया, कोई एक्शन नहीं लिया। अब वन विभाग के अधिकारी शासनस्तर से अनुमति मिलने के बाद ही इनको शिफ्ट कराने की बात कह रहे हैं। इस बारे में जब डीएफओ मथुरा अरविंद कुमार ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि हिरणों की संख्या ज्यादा होने के कारण प्रकरण सम्बन्धी पत्रावली निर्णय के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों के लिए लखनऊ भेजी जा चुकी हैं। अभी कोई आदेश प्राप्त नहीं हो सका है।


मांगी थी जू की परमीशन, मिली नहीं

डीएफओ मथुरा अरविंद कुमार ने बताया कि शरणानंद महाराज के आश्रम के पास केवल एक हाथी रखने की परमीशन है, लेकिन हिरणों को रखने या पालने की परमीशन न आश्रम के पास है और ना ही वन्यजीव अधिनियम के तहत इसकी परमीशन दी जा सकती है। डीएफओ ने बताया कि पूर्व में आश्रम के द्वारा जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया से चिड़ियाघर के लिए परमीशन मांगी थी लेकिन इन्हें परमीशन नहीं मिली। अब हिरणों को यहां से किसी सुरक्षित स्थान या हिरण अभ्यारण्य में शिफ्ट कराने के लिए लखनऊ में निर्णय लिया जाना है।


सात महीने बाद भी विभाग नहीं ले सका निर्णय

विभाग के द्वारा जो निर्णय लिया जाना है वह अभी तक नहीं लिया गया है और 7 महीने बीत चुके हैं। इन हिरणों को कहां रखा जाए और इन्हें स्विफ्ट कैसे किया जाए विभाग के अंदर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। देखने वाली बात यह होगी कि कब तक विभाग इन हिरणों को यहां से शिफ्ट करा पाता है।

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