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इसलिए साधु-संतों में बढ़ रही डायबिटीज की बीमारी

मधुमेह के खतरे के प्रति लोगों को जागरुक करने को हर वर्ष 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है।

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मथुरा

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Mukesh Kumar

Nov 14, 2017

56 bhog

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मथुरा। डायबिटीज (मधुमेह) बहुत की खतरनाक बीमारी है। इसे सभी बीमारियां की जड़ भी कहा जाता है। दुनिया में बढ़ते डायबिटीज (मधुमेह) के खतरे के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर वर्ष 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। इस मौके पर पत्रिका टीम ने मथुरा के लोगों से बातचीत की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। खास बात ये कि यहां के ज्यादातर साधु-संत भी इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं।

25 से 30 फीसद संतों में डायबिटीज
इस संबंध में जिला अस्पताल के डॉक्टर अमिताभ पांडेय ने बताया कि आम आदमी और साधु-संतों में ज्यादातर शुगर पाया गया है। मथुरा और वृंदावन की अगर हम बात करें तो 25 से 30 प्रतिशत साधु-संत डायबिटीज के शिकार हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि साधु-संत मीठा प्रसाद ज्यादा खाते हैं। डॉक्टर के मुताबिक आम नागरिक में डायबिटीज की बीमारी तेजी से फैलने का एक कारण जंक और फास्ट फूड भी है।

इंसान को खोखला कर देती है ये बीमारी
वृंदावन के संत विमल चैतन्य का कहना है कि जैसे लकड़ी के अंदर जैसे घुन लग जाता है और उस लकड़ी को अंदर से ख़त्म कर देती है। ठीक उसी प्रकार से डायबिटीज मनुष्य को अंदर से खोखला कर देती है। अगर किसी के भी शुगर की बीमारी हो जाए तो समझ लीजिये की सभी तरह की बीमारी अपने आप ही आ जाती है। इसलिए भारतीय खानपान ही लें।

नहीं चलाया गया जागरुकता अभियान
संत देवस्वरूपा नंद ने कहा कि आज विश्व डायबिटीज डे तो है लेकिन ऐसा लगता नहीं है। क्योंकि जिला प्रशासन की और से किसी तरह का भी जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया है। जिससे लोगों को पता चल सके कि इस बीमारी से किस तरह बचा जाए। देवस्वरूपा नंद ने कहा कि उनके गुरु को भी डायबिटीज है। हर समय वो अपने साथ दवाई लेकर चलते हैं।