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शराब पिला कर हथनी ‘एम्मा के साथ करते थे अत्याचार ,वाइल्ड लाइफ ने बचाकर किया उपचार

- चालीस वर्षीय हथनी ‘एम्मा’ को उसके मालिकों द्वारा नियंत्रित करने के लिए पिलाई जाती थी शराब - उपेक्षा की शिकार हथनी को वाइल्ड लाइफ एसओएस और वन विभाग ने बचाया - वर्षों से गंभीर दुर्व्यवहार के कारण, एम्मा हथनी के पैरों में दर्द

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मथुरा

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arun rawat

Jan 06, 2021

हाथी संरक्षण केंद्र में लायी गयी हथनी एम्मा - फ़ोटो - पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

हाथी संरक्षण केंद्र में लायी गयी हथनी एम्मा - फ़ोटो - पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

मथुरा. हथनी को 300 मील से अधिक दूरी चला कर झारखंड राज्य की सीमाओं को पार कर अवैध रूप से ले जाया जा रहा था, जहां वन विभाग ने उसके मालिकों पर वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन और गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाया। वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ एसओएस से हथनी को उनके हाथी अस्पताल में चिकित्सा उपचार और देखभाल प्रदान करने की सहायता करने का अनुरोध किया।

वर्षों से गंभीर दुर्व्यवहार के कारण, एम्मा हथनी के पैरों में दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बिमारी) से पीड़ित है l कांच, कीलें और पत्थर के टुकड़े उसके पैरों में घुस कर घाव कर चुके हैं। कुपोषण के कारण उसकी स्वास्थ्य स्थिति भी काफी खराब है। इस 40 वर्षीय हथनी की ज़िन्दगी में राहत के पल बहुत ही कम थे, उसे भीख मांगने, धार्मिक जुलूस, शादी समारोह, पर्यटक सवारी जैसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता था, जो उसके मालिक को आकर्षक लगता था। रात में, उसे कसकर बाँध दिया जाता था जिसकी वजह से वह लेटने और आराम करने में असमर्थ थी। उसे मिठाइयों और तले हुए खाद्य पदार्थों से निर्मित अस्वस्थ आहार खिलाया जाता था, जिससे कारण उसे अपने स्वास्थ के साथ भी गंभीर समझौते करने पड़े।

हथनी “एम्मा" को पैरों में दर्द के बावजूद देसी शराब पिला कर काम करने के लिए मजबूर किया जाता रहा। जब उसके मालिकों से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे उसे उचित चिकित्सा उपचार नहीं प्रदान करवा सकते। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए कैद में हाथियों को शराब और तम्बाकू दिया जाना उनके मालिकों के लिए अचरज की बात नहीं है। वास्तव में, यह शराब हाथी के लिए किसी विष से कम नहीं होती। इस तरह की अमानवीय हरकत भी खतरनाक साबित हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप हाथी भीड़भाड़ वाले इलाके में अपना खो सकता है, जिसके कारण निर्दोष दर्शकों की जान खतरे में पड़ सकती है।

हथनी की स्थिति के बारे में वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ एसओएस को सूचना दी और उसे तुरंत उपचार एवं चिकित्सकीय देखभाल के लिए मथुरा स्थित वाइल्ड लाइफ एसओएस के हाथी अस्पताल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। झारखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने बीमार हथनी के तत्काल परिवहन के लिए लिखित अनुमति जारी की।

वाइल्ड लाइफ एसओएस ने विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हाथी एम्बुलेंस में पशुचिकित्सा विशेषज्ञों और हाथियों की देखभाल करने वाली एक टीम को मथुरा से धन्यबाद , झारखंड के लिए 1000 मील से भी अधिक दूरी को तय करने के लिए रवाना किया। वाइल्ड लाइफ एसओएस के पशुचिकित्सकों द्वारा प्रारंभिक जांच में पता चला कि हथनी को पैरों में गंभीर दर्द है जिसके कारण वह अपने आगे के दोनों पैरों पर स्वयं का ही भार उठाने में असमर्थ है।

डॉ. इलियाराजा, वाइल्ड लाइफ एसओएस की पशुचिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक, ने कहा, “एम्मा के लिए उसके नाजुक और संवेदनशील पैरों पर खड़ा होना दर्द से भरपूर है। वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ने उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है। हमने उसके पैरों में लगे कांच, कीलें और पत्थर के टुकड़े निकाल दिए हैं।

बिमल लाकरा, डीएफओ, धनबाद ने कहा, “अवैध रूप से हथनी को राज्य की सीमाओं के पार ले जाया जा रहा था और अवैध दस्तावेज के आधार पर वन विभाग द्वारा जब्त कर लिया गया था। उसके बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण, यह निर्णय लिया गया कि हाथी को तत्काल हाथी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाए।

By - Nirmal Rajpoot