
फरसा बाबा की ट्रक से कुचलकर हुई मौत, PC- X
मथुरा : 'लाख करो तीर्थ, पूजन करो हजार, गोमाता न बचा सके, सब कुछ है बेकार…' घर के बाहर लगे इस बोर्ड की पंक्तियों को ही अपना जीवनमंत्र मानने वाले फरसा बाबा (चंद्रशेखर सिंह) अब इस दुनिया में नहीं रहे। शनिवार तड़के एक ट्रक की चपेट में आने से उनकी संदिग्ध मौत हो गई। बाबा की मौत की खबर फैलते ही पूरा ब्रज उबल पड़ा। आक्रोशित हजारों लोगों ने दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे जाम कर दिया, जिसके बाद पुलिस और जनता के बीच तीखी झड़प हुई।
घटना शनिवार सुबह करीब 5 बजे की है। डीआईजी के अनुसार, चंद्रशेखर गोतस्करी के शक में एक ट्रक की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से आए दूसरे ट्रक ने टक्कर मार दी और इस हादसे में उनकी जान चली गई। बाबा के साथियों और भाई केशव सिंह का सीधा आरोप है कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि गौतस्करों द्वारा रची गई एक सुनियोजित हत्या है। उन्होंने दोषियों को फांसी देने की मांग की है।
फरसा बाबा के भाई केशव सिंह ने बताया कि वह मेरे छोटे भाई थे। उनकी उम्र 45 साल थी। वह मूलरूप से फिरोजाबाद के सिरसागंज लंगड़ा के रहने वाले थे। बाबा ने गौ रक्षा का संकल्प उठाया था और उन्होंने शादी नहीं की थी। केशव ने बताया कि परिवार में हम दोनों सगे भाई थे। मेरे 4 बेटे, 4 बहुएं, 7 पोते और 6 पोतियां हैं।
केशव आगे बताते हैं कि हम लोग अयोध्या में रहते हैं। पहले बाबा भी हमारे साथ अयोध्या में रहते थे। जब अयोध्या की मस्जिद टूटी थी, उसी समय ये अयोध्या से मथुरा आ गए थे। एक बार हम लोग मथुरा आकर उन्हें अयोध्या ले गए थे। लेकिन, वो फिर मथुरा लौट गए थे।
बाबा की मौत से गुस्साए समर्थकों ने मथुरा के छाता कस्बे में जमकर उत्पात मचाया। उग्र भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। घंटों तक नेशनल हाईवे पर आवाजाही ठप रही।
45 वर्षीय चंद्रशेखर सिंह को लोग 'फरसा बाबा' के नाम से जानते थे। हाथ में हमेशा रहने वाला 15 किलो भारी फरसा, गेरुआ वस्त्र और माथे पर बड़ा लाल टीका उनकी पहचान थी।
वे न केवल जीवित गायों को बचाते थे, बल्कि मृत गायों का चंदन, चुनरी और तुलसी के साथ पूरे शास्त्रोक्त विधि से अंतिम संस्कार भी करते थे। बाबा की दिनचर्या रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक हाईवे पर गौ-तस्करों से लोहा लेने और गोमाता की रक्षा करने की थी। फरसा बाबा को अगर कहीं पर भी अवारा गाय दिखाई देती थी तो वह उसे अपनी गौशाला में ले आते थे और उसकी सेवा करते थे।
Updated on:
21 Mar 2026 06:22 pm
Published on:
21 Mar 2026 06:22 pm
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