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दूसरे दिन भी गोवर्धन पूजा को उमड़ा जनसैलाब, 73 देशों से आए भक्त

- मंगलवार को गौड़ीय वेदांत समिति ने निकाली गोवर्धन पूजा शोभायात्रा, लाखों भक्तों ने लिया भाग -विदेशी महिलाओं ने सिर पर दूध, दही, माखन की मटकी रखी, डलियों में तरह-तरह के बनाये व्यंजन सजाए

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मथुरा/गोवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली एवं गिरिराज पूजा के प्राकट्य स्थल गोवर्धन धाम में पूजा के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। दो दिवसीय गोवर्धन पूजा महोत्सव में जहां पहले दिन लाखों भक्तों ने साक्षात गोवर्धन पर्वत की 21 किमी की परिक्रमा लगाई तो दूसरे दिन मंगलवार को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे करीब 73 देशों से आये लोग गिरिराज जी की पूजा में शामिल हुए।

प्राचीन है ये परंपरा
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों के संग मिलकर इन्द्र का मानमर्दन करने के लिए गिरिराज जी को साक्षात देव मानकर पूजा की थी, आज उसी साढ़े पांच हजार वर्ष पुरानी परंपरा को साक्षात किया। विदेशी भक्त सब कुछ भूलकर भारतीय संस्कृति के परिधान में नजर आये। विदेशी महिलाओं ने सिर पर दूध, दही, माखन की मटकी रखी तो डलियों में तरह-तरह के बनाये व्यंजन सजाये। भक्तों ने गिरिराज पूजा महोत्सव में खूब नृत्य किया। गौड़ीय वेदांत समिति के संस्थापक नारायण दास महाराज की कृपा से प्रत्येक वर्ष गिरिराज जी की पूजा होती है। इस बार शोभायात्रा भक्ति वेदांत दंडी स्वामी माधव दास महाराज के सानिध्य में हरिनाम संकीर्तन के बीच निकाली गई। राजा वाले मंदिर स्थित गिरिराज जी की शिला पर दूध, दही, शहद, बूरा, गंगाजल, दूध आदि ने देशी-विदेशी भक्तों ने अभिषेक किया। पारंपरिक पूजा अर्चना दसविसा के रहने वाले गिरधारी शर्मा ने कराई। शोभायात्रा गिरधारी गौड़ीय मठ से शुरू होकर बस स्टैंड, सौंख अड्डा, दानघाटी मंदिर, मुरारी कुंज, बड़ा बाजार मोदी खाना, हाथी दरवाजा, मानसी गंगा होकर निकाली गई। गिरिराज तलहटी के राजा वाले मंदिर पर गिरिराज महाराज की पूजा अर्चना की। आस्था और विश्वास में भक्ति इस प्रकार प्रस्फुटित हुई कि गिरिराज महाराज के जयकारों की गूंज रही। पारंपरिक गोवर्धन पूजा में भाग लेने के लिये अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, न्यूजीलैण्ड सहित 73 देशों के भक्त शामिल हुये है।

सात समुंदर पार से खींच लाई श्रीकृष्ण की भक्ति
किसी का नाम विसाखा तो किसी का नाम तुलसी, महिलाएं भी साड़ी पहनकर गोपी भेष में नजर आई। विदेशी महिलाओं का कहना है कि वे अपने देश से एक माह तक कृष्ण भक्ति करने आती हैं। आस्टेªलिया से आई विसाखा दासी ने बताया कि वे अपने देश में बैंक में काम करती हैं लेकिन गुरू जी की सानिध्यता में वे प्रत्येक साल यहां एक माह तक छुट्टी लेकर कार्ति नियम सेवा करती हैं। उनको श्रीकृष्ण की पूरी लीलाओं की जानकारी है। श्रीकृष्ण की गिरिराज जी की लीला अनूठी है। कैनेडा से आयी जय दासी ने बताया कि वे प्रत्येक वर्ष से पांच साल से पूजा अर्चना करने आती हैं। चीन से आई जैस ने बताया कि उनको भारतीय संस्कृति और उससे जुड़े कार्यक्रम अच्छे लगते हैं। इस अवसर पर भक्ति वेदांत माधव महाराज के अलावा नरसिम्हा महाराज, वन महाराज, गोविंद महाराज, तीर्थ महाराज, श्रीधर महाराज, नारायण दास महाराज, मठ के वरिष्ठ प्रबंधक शुभ ज्योति प्रभु आदि शामिल रहे।

चक्लेश्वर पर गहरे गड्ढे के बीच गिरने से बचे श्रद्धालु
गिरिराज पूजा महोत्सव के लिए प्रशासन ने इस बार कोई व्यवस्था नहीं की इतना ही नहीं मानसी गंगा को जाने वाले रास्ते पर करीब दस दिन से गहरा गड्ढा खोद दिया गया है। यहां से पैदल निकलना भी मुश्किल है। जब गौड़ीय वेदांत समिति की शोभायात्रा निकाली गई तो श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब पांच फीट गहरे गड्ढे से बचकर श्रद्धालु निकलते नजर आये। श्रद्धालुओं में प्रशासन द्वारा व्यवस्था नहीं किये जाने पर रोष था। नागपुर से शामिल हुई महिला भक्त मंजू ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। सड़क भी खराब पड़ी है। बताते चलें कि नगर पंचायत प्रशासन द्वारा पेयजल आपूर्ति की पाइप को ठीक करने के लिए गहरा गड्ढा खोद दिया है। विदेशी भक्त मंजरी ने बताया कि वे गहरे गड्ढे में गिरने से मुश्किल से बची।

मन में बसे हैं गोपाल जी
गोवर्धन पूजा महोत्सव में पंजाब जालंधर से शामिल होने आई गीता दासी ने बताया कि वे आठ साल से लगातार गोवर्धन पूजा महोत्सव में शामिल होने आ रही हैं। सबसे पहले आई तो यहां से लड्डू गोपाल लेकर गई थी। वे हर वर्ष लड्डू गोपाल को साथ लेकर आती हैं। गोपाल जी उनके मन में बसे हैं।