
गोवर्धन में भजन ध्यान में भावविभोर श्रद्धालु
मथुरा /गोवर्धन। देश ही नहीं विदेशियों को भी भगवान Govardhan Puja करना अच्छा लगता है। इसी क्रम में गोपी-गोपिकाओं की भेषभूषा में और हाथ में झांझ-मजीरे के बुधवार को विदेशी भक्त गोवर्धन पहुंच गए है। और ऐसी पूजा कर रहे है जो कभी भी आपने नहीं देखी होगी। Govardhan Puja महोत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। तेरे माथे मुकुट विराज रहयौ की अभिव्यक्ति समूची तलहटी में नजर आ रही है। गोवर्धन पूजा के मुख्य केन्द्र गोवर्धन धाम में गिर्राज पूजा महोत्सव के लिए देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भक्त भी पूजा करने का आतुर हैं।
गिरिराज पूजा और दीपावली पर दीपदान करने से पहले अंतर्राष्ट्रीय गौड़ीय वेदांत समिति और इस्काॅन की ओर से करीब चालीस देशों से अनुयायियों ने गिरिराज जी की रज में परिक्रमा लगाई। विदेशी भक्त श्रीकृष्ण व गिरिराज जी की भक्ति में इस तरह खोये हुए हैं कि सब कुछ छोड़कर ब्रज रज में रम गये हैं। ब्रज गोपियों की पोशाक और हाथ में कंठी माला-झोली लेकर हरि बोल हरि बोल नाम जप रहे हैं।
यहां आन्यौर गोविंद कुंड, पूंछरी में अप्सरा कुंड व जतीपुरा में सुरभि कुंड में भक्तों ने आचमन करते हुए गिरिराज जी की द्वापर युगीन लीलाओं को साक्षात किया। ब्राजील से आई विदेशी भक्त गुरू से मिले नाम तरूणी गोपी दासी ने बताया कि पांच हजार साल पहले गिरिराज जी की पूजा कराई और अब भी वे पूजा करने आई हैं।
आस्ट्रेलिया से आई विसाखा दासी ने तो बताया कि गिरिराज जी में जो आनंद की अनुभूति होती है वह पूरी दुनिया में नहीं हैं। श्री कृष्ण भक्ति और गिर्राज पूजा को लेकर माधव महाराज, तीर्थ महाराज, नारायण दास महाराज ने बताया कि 55 देशों में श्रीकृष्ण की लीलाओं को अनुसरण करने वाले भक्त जुड़े हैं।
इन्हीं लीलाओं में गिरिराज जी की लीला है। यहां गिर्राज जी साक्षात् विराजमान हैं। गोवर्धन पूूजा 20 अक्टूबर होगी। गिरिराज दानघाटी मंदिर, मुकुट मुखारविंद मंदिर, राजा जी के मंदिर के पीछे तलहटी में गिरिराज पूजा को भक्त पहुचेंगे।
ब्राजील से आई तरूण गोपी दासी को श्रीकृष्ण की लीलाएं याद हैं। उन्होंने बताया कि गुरू जी के आदेशानुसार वे छप्पन भोग व अन्नकूट महोत्सव में शामिल होने ब्राजील से आई हैं। ये उनके लिए अलग अनुभव हैं। ब्रज में आकर शांति व आध्यात्मिक अनुभव होता है।
Published on:
18 Oct 2017 09:12 pm
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