उसके बाद विधिविधान से गाय के दूध से नहलाया जाता है। फिर आरती की जाती है। फिर सभी गोवर्धन महाराज की जय जय कार करते हुए इनकी परिक्रमा करते हैं। यहाँ पर एक गाय को भी लाया जाता है, जिसके द्वारा गोबर में पैर लगाया जाता है। प्रसाद वितरण होत है। सभी भक्त गोवर्धन की पूजा करने के बाद यहाँ से गोबर का प्रसाद भी लेकर जाते हैं। इसके लिए कभी-कभी तो भक्तों को जोर भी आजमाना पड़ता है।