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बल्देव के दाऊजी मंदिर में कपड़ा फाड़ होली, हुरियारों पर बरसाए कोड़े, देखें रोमांचकारी वीडियो

बल्देव के दाऊ जी मंदिर में इस अनोखी होली को देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे।  

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मथुरा। बृज में होलिकोत्सव के कई रंग हैं। मथुरा के राधारानी मंदिर में लड्डू होली, बरसाना और नंदगांव में लठामार होली, श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर फूलों की होली, ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में कीच की होली, गोकुल में छड़ी मार होली, द्वारिकाधीश मंदिर में बगीचा होली, आगरा में मनकामेश्वर नाथ का डोला। प्रियाकांत जू मंदिर, वृंदावन में हजारों लोगों ने होली पर रंग और गुलाल से होली खेली। शुक्रवार को हुरंगा हुआ। हुरंगा मतलब कपड़ा फाड़ होली। कपड़े के कोड़ों से पिटाई। बल्देव के दाऊ जी मंदिर में इस अनोखी होली को देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे।

हजारों श्रद्धालु दाऊजी पहुंचे
कान्हा की नगरी में 40 दिन चलने वाली होली का समापन शुक्रवार को हुरंगा के साथ हो गया। समापन दिवस पर योगीराज भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई दाऊजी महाराज के गांव बल्देव में पांडेय समाज द्वारा विश्व प्रसिद्ध कपड़ा फाड़ हुरंगा का आयोजन दिव्यता और भव्यता के साथ किया गया। इसे देखने के लिए देश विदेश से हज़ारो की संख्या में श्रद्धालु दाऊजी पहुंचे।

मान्यता

मान्यता है कि इस हुरंगा की कहानी भगवान श्री कृष्ण की चीरहरण लीला से जुड़ी हुई है। कहा जाता है जब भगवान श्री कृष्ण यमुना में निर्वस्त्र स्नान कर रही गोपियों के कपड़े चुरा कर जल में निर्वस्त्र स्नान न करने का संदेश दिया था। इस बात से नाराज गोपियों ने श्रीकृष्ण के बड़े भाई यानी बलदाऊजी के कपड़े फाड़ दिए थे। कपड़े के कोड़े बना कर मारने के लिए पीछे दौड़ी थीं। तभी से ये परम्परा शुरू हुई। भाभी अपने देवरों के कपड़े फाड़ कर कोड़े बनाती हैं और जमकर मार भी लगाती। ये परम्परा देखने और सुनने में तो अजीबोगरीब लगती है। न दाऊजी में इस परम्परा को सैकड़ों वर्षों से पांडेय समाज बखूबी निर्वाह करता चला आ रहा है। समय के साथ अब यह हुरंगा विश्व प्रसिद्ध हो चुका है। अबीर गुलाल के साथ भाभी और देवरों ने जमकर सप्तरंगी हुरंगा खेला।