
प्रदूषण इमरजेंसीः पराली जलाने पर होगी जेल, हजारों टन कूड़ा जलाने पर नहीं!
मथुरा। पराली जलाने पर किसान को जेल होगी लेकिन हजारों टन कूड़ा जलाने पर नहीं, नियम कुछ भी कहते हों लेकिन हकीकत यही है। कम से कम कान्हा की नगरी में तो यही सब हो रहा है। जनप्रतिनिधि इसे देख कर भी चुप हैं तो अधिकारी सब जानकर भी अनजान बनें हैं।
समूचे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण पर हंगामा बरपा हुआ है। दिल्ली में इमरजेंसी घोषित है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी हालत खराब है। पराली जलाने वालों किसानों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है। किसानों पर जुर्माना ठोका जा रहा है। पराली जलाने की सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। सरकारी मशीनरी द्वारा दिखाया ऐसा जा रहा है कि वह प्रदूषण की स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं। मथुरा में भी जिलाधिकारी लगातार बैठक कर रहे हैं। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने जनपद के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदूषण के मुद्दे पर कई दिशानिर्देश दिये हैं, बैठक में डीएम ने उप कृषि निदेशक से कहा कि किसी भी क्षेत्र में पराली जलाने की शिकायत न मिले इसके लिए किसानों को जागरूक करके उन्हें पराली से होने वाले नुकसानों के विषय में भी अवगत कराया जाय। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों पराली जलायी जायेगी उन क्षेत्रों के प्राविधिक सहायकों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जायेगी।
वहीं इस कवायद का दूसरा पहलू बेहद डरावना है। सरकारी मशीनरी अपने किये धरे पर आंखें मूंदे हुए है। पराली चलाने पर किसान पर तो चाबुक चलाया जा रहा है लेकिन महानगर के हजारों टन कूडे को खुद यही मशीनरी वर्षों से सिर्फ जलाकर नष्ट कर रही है। यमुनापार में बने नगर निगम के डलाब घर से धूंआ के गुबार उठना कभी बंद नहीं होते। यहां प्रदूषण हमेशां ही खतरनाक स्तर पर रहता है। डलाब घर बनने के बाद क्षेत्र का विकास ही अवरूद्ध हो गया है। लोग मकान बेच कर जा रहे हैं। यहां कोई बसना नहीं चाहता। गंदगी और बदबू ने यहां रह रहे लोगों का जीना ***** कर दिया है। जब हवा का रूख बस्ती की ओर हो जाता है तो लोगो घरों से निकल कर इधर उधर चले जाते हैं। यह कूडा जलाने की प्रक्रिया लम्बे समय से जारी है। हाल ही में सांसद हेमा मालिनी भी यहां दौरा कर चुकी हैं। उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भी आ चुके हैं लेकिन इन धूआं के उठाते बादलों को देख कर भी सब चुप्पी साधे रहते हैं।
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कचरे के पहाड़ में रोज जुड़ रहा 120 टन कूड़ा
नगर पालिका से नगर निगम बनने के बाद अफसरों ने नगला कोल्हू के समीप बने खत्ताघर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए प्राइवेट कंपनी से करार किया है। यहां कंपनी को कचरे से खाद बनानी है। खाद बनाना तो दूर कंपनी ने आबादी क्षेत्र की ओर कचरे के पहाड़ खड़े कर उसमें आग लगाना शुरू कर दिया है। कचरों के टीलों से उठता धुआं हवा के साथ आबादी की ओर उड़ रहा है। यहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बना है। इसमें से आ रही बदबू के कारण आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों का जीना दूभर हो गया है। प्लांट इंचार्ज कुलदीप सिंह ने बताया कि कंपोस्ट को तैयार करने का प्लांट काफी पुराना है। ये 2011 में लगा था। बीच में बंद रहने के कारण मशीन में खराबी आ गई है। मशीन को दुरुस्त करने का काम अंतिम चरण में हैं। खाद तैयार करने के लिए नमूना दिल्ली लैब भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। प्लांट पर करीब 110-120 टन तक का कूड़ा रोजाना आ रहा है।
Published on:
05 Nov 2019 08:39 pm
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