
मथुरा। कान्हा की नगरी में श्रावण मास को देखते हुए नित नए दिन भगवान द्वारकाधीश मंदिर में अलग-अलग घटनाओं और हिंडौलों का आयोजन किया जाता है। भगवान श्रावण मास में अपने भक्तों को भगवान दर्शन देते नजर आते हैं। वहीं जन्माष्टमी को ब्रज के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। भगवान द्वारकाधीश मंदिर में बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। ठाकुर को लाड़ लड़ाने के लिए 9 घटाएं और 19 हिंडौलों का आयोजन मंदिर में किया जाता है। अजन्मे के जन्म से पूर्व ब्रज के प्रमुख मंदिरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं भगवान को लाड लड़ाने के लिए हर दिन नए-नए आयोजन मंदिरों में किए जा रहे हैं।
भगवान द्वारकाधीश मंदिर में श्रावण मास में होने वाले आयोजनों को लेकर मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया की ब्रज में 4 महीनों का विशेष महत्व रहता है। ब्रज में अतिथि घड़ी पल नक्षत्र और ऋतु के हिसाब से पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिर द्वारकाधीश में भगवान की बाल रूप की सेवा की जाती है। द्वारकाधीश मंदिर में 9 घटा और 19 हिंडौलों का आयोजन दो महीनों में होता है। 100 वर्ष पूर्व भगवान द्वारकाधीश के लिए तीन हिंडौले बनवाए गए। जिनमें 100 तोले का एक सोने का हिंडोला है और 2 हिंडौले 100-100 तोले के चांदी के हैं।
उन्होंने बताया कि इन महीनों में बालस्वरूप ठाकुर द्वारकाधीश को सूती वस्त्र धारण कराए जाते हैं। मंदिर में आठ झाँकी और चार आरती होती हैं। मंदिर सुबह 6:30 बजे खोला जाता है। सुबह 6:30 से 7:00 बजे तक मंगला आरती होती है। सुबह 7:40 से 7:55 तक श्रृंगार आरती की जाती है। ग्वाला खेल 825 से 8:40 तक सुबह आयोजन होता है। सुबह 10:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक राजभोग के दर्शन होते हैं। मीडिया प्रभारी ने बताते हुए कहा मंदिर शाम 4:00 बजे खुलता है और उसके बाद आरती होती है शाम को मंदिर बंद होने से पहले शयन आरती भगवान की की जाती है।
उन्होंने बताया कि दिन में चार आरती होती हैं। पहली मंगला आरती, दूसरी राजभोग आरती, तीसरी संध्या आरती और चौथी शयन आरती। 9 घटा और 18 हिंडौलों का होता है मंदिर में आयोजन भगवान द्वारकाधीश मंदिर के मीडिया प्रभारी ने कहा की भगवान को कई तरह के हिंडौलों में झुलाया जाता है। फिरोजी जरी हिंडौला, गुलाबी मखमल हिंडौला, श्याम मखमल हिंडौला, नीलो मखमल हिंडौला, लाल मखमल हिंडौला, हरे मखमल हिंडौला, आसमानी मखमल हिंडौला, श्याम मखमल हिंडौला, फूलों का हिंडौला, फूल पत्ती का हिंडौला, केसरी मखमल हिंडौला, फल फूलों का हिंडौला, पचरंगी फूलों का हिंडौला, आसोपालव हिंडौला, पवित्रा का हिंडौला, वहीं केसरी घटा, हरी घटा, सासनी घटा, आसमानी घटा, गुलाबी घटा, लाल घटा, लहरिया घटा और आखरी जो मनोरथ होता है वह सफेद घटा का होता है।
Published on:
10 Aug 2021 03:38 pm
