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इस गांव में शापित है करवाचौथ, सती के श्राप के बाद हुआ कुछ ऐसा कि आज भी नहीं रखा जाता करवाचौथ वृत

-करवाचौथ और अहोई अष्टमी का वृत है शापित है

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मथुरा

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Amit Sharma

Oct 16, 2019

इस गांव में शापित है करवाचौथ, सती के श्राप के बाद हुआ कुछ ऐसा कि आज भी नहीं रखा जाता करवाचौथ वृत

इस गांव में शापित है करवाचौथ, सती के श्राप के बाद हुआ कुछ ऐसा कि आज भी नहीं रखा जाता करवाचौथ वृत

मथुरा। कान्हा की नगरी के गांव सुरीर में सुहाग की सलामती के लिए रखा जाने वाला करवाचौथ वृत और बेटों के लिए मां अहोई अष्टमी का वृत रखने से परहेज करती हैं। माना जाता है कि यह वृत इस गांव में शापित है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। गुरूवार को जहां पति की लम्बी आयु के लिए सुहागिनें वृत रख कर पूजा अर्चना करेंगी और रात के समय सुहागिनें चंद्रा को अर्घ देंगे मथुरा के गांव सुरीर में सन्नाटा पसरा रहेगा।

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कहा जाता है कि सती के श्राप से बचने के लिए इन दोनों वृतों को रखने से महिलाएं परहेज करती हैं। सती माता का मंदिर भी गांव में है। महिलाएं इस मंदिर पर जाकर पूजा करती हैं। गांव के मोहल्ला बाघा में ठाकुर समाज की महिलाएं वर्षों से दोनों वृत नहीं करती हैं। यहां आने वाली नवविवाहिताओं की हसरत दिल में ही रह जाती है। जब वह अपने से पहले गांव में ब्याहकर आईं महिलाओं को वृत रखते नहीं देखती हैं तो वह भी इस परंपरा को मानने लगती हैं। विवाहिता रेखा का कहना कि शादी के बाद गांव में आने पर पता चला कि यहां यह दोनों वृत नहीं रखे जाते हैं। एक दूसरी महिला का कहना था कि इस परंपरा को तोडने की हिम्मत करना तो दूर सोचना भी पाप है। यह हम सभी महिलाओं के दिलो दिमाग में गहरे से बैठा हुआ है। जब यह परंपरा इतने लम्बे समय से निभाई जा रही है तो इसका पालन करना ही ठीक है। इस परंपरा के पीछे जरूर कोई मजबूत तथ्य छिपा है।

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बुजर्गों की मानें तो सैकड़ों वर्ष पहले गांव रामनगला (नौहझील) का ब्राह्मण युवक अपनी पत्नी को विदा कराकर घर लौट रहा था। सुरीर में होकर निकलने के दौरान वघा मोहल्ले में ठाकुर समाज के लोगों का ब्राह्मण युवक की बग्घी के भैंसा को लेकर विवाद हो गया। जिसमें इन लोगों के हाथों ब्राह्मण युवक की मौत हो गई थी। अपने सामने पति की मौत से कुपित मृतक ब्राह्मण युवक की पत्नी इन लोगों को श्राप देते हुए सती हो गई थी। इसे सती का श्राप कहें या बिलखती पत्नी के कोप का कहर, संयोगवश इस घटना के बाद मोहल्ले में मानो कहर आ गया। कई जवान लोगों की मौत हो गई, महिलाएं विधवा होने लगीं। शोक, डर और दहशत से इन लोगों के परिवार में कोहराम मचने लगा। जिसे देख कुछ बुजर्ग लोगों ने इसे कहर को सती का श्राप मानते हुए क्षमा याचना की और मोहल्ले में मंदिर बना कर सती की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। पति और पुत्रों की दीर्घायु को मनाए जाने वाले करवाचौथ एवं अहोई अष्टमी के त्योहार पर सती बंदिश लगा गई थी। तभी से त्योहार मनाना तो दूर इनकी महिलाएं पूरा साज-श्रृंगार भी नहीं करती हैं। उन्हें ऐसा करने पर सती के नाराज होने का भय बना रहता है।

इनपुट- सुनील शर्मा