17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाथरस मामला: मथुरा कोर्ट ने केरल के पत्रकार, तीन अन्य की न्यायिक हिरासत बढ़ाई

चारों के खिलाफ राजद्रोह के मामले में है केस दर्ज चारों के खिलाफ राजद्रोह के मामले में है केस दर्ज

2 min read
Google source verification
kerala journalist

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मथुरा. यूपी पुलिस द्वारा हाथरस जाने के रास्ते में गिरफ्तार केरल के एक पत्रकार और तीन अन्य की न्यायिक हिरासत अवधि मथुरा की स्थानीय अदालत ने एक बार फिर बढ़ा दी है। सभी हाथरस में 19 वर्षीय दलित युवती से कथित सामूहिक बलात्कार और फिर उसकी मौत के बाद पीडि़त परिवार से मिलने जा रहे थे।

पुलिस ने इस महीने के शुरुआत में उन्हें कोई संज्ञेय अपराध करने की मंशा रखने के शक में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में चारों के खिलाफ राजद्रोह और आतंकवाद रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद उन्हें सात अक्टूबर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि पूरा होने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश किया गया था, जिसके बाद मथुरा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंजू राजपूत ने उनकी न्यायिक हिरासत अवधि दो नवंबर तक बढ़ा दी। सीजेएम राजपूत ने इससे पहले कप्पन से मिलने के लिए केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (केयूडब्ल्यूजे) द्वारा दायर की गई याचिका खारिज कर दी थी।

सहायक अभियोजन अधिकारी ब्रजमोहन सिंह ने बताया कि अदालत ने पत्रकार कप्पन और उनके सहयोगियों अतीक-उर-रहमान, आलम और मसूद की न्यायिक हिरासत अवधि यह कहकर बढ़ा दी कि पुलिस को अभी उनके खिलाफ राजद्रोह और आतंकवाद संबंधी मामले में जांच पूरी करनी है। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत अवधि दो नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। मथुरा एसडीएम ने सीआरपीसी की धारा 107 के तहत समाज में शांति बनाए रखने के लिए सोमवार को चारों को एक-एक लाख रुपये का बॉन्ड भरने के आदेश दिए। उनकी रिहाई के लिए बॉन्ड भरने की प्रक्रिया के लंबित होने की वजह से मथुरा के मांट सब डिविजन के एसडीएम सुरेश कुमार ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 116 के तहत 14 दिनों तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुलिस ने कहा था कि गिरफ्तार लोगों से उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ साहित्य भी जब्त किए गए हैं जो शांति और कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे। इससे पहले पीएफआई पर इस साल की शुरुआत में देश भर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की फंडिंग का आरोप लगा था और उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इन चारों पर आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (दो समूहों में धार्मिक आधार पर शत्रुता को बढ़ाना) और 295ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। चारों पर यूएपीए कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं। हाथरस पुलिस ने इन चारों के खिलाफ राजद्रोह के एक और मामले में भी केस दर्ज किया है।