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मथुरा में ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की याचिका जिला कोर्ट ने स्वीकारी, 18 नवम्बर को होगी सुनवाई

मथुरा में 'श्रीकृष्ण विराजमान' की याचिका जिला कोर्ट ने स्वीकारीजिला जज ने सभी विपक्षी पार्टियों को जारी किया नोटिस 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद

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मथुरा में 'श्रीकृष्ण विराजमान' की याचिका जिला कोर्ट ने स्वीकारी

मथुरा में 'श्रीकृष्ण विराजमान' की याचिका जिला कोर्ट ने स्वीकारी

मथुरा. 'श्रीकृष्ण विराजमान' की अपील पर करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद जिला जज ने याचिका को स्वीकार कर सभी विपक्षी पार्टियों को नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने 18 नवम्बर को सुनवाई की अगली तारीख तय की है।

विगत सोमवार को भगवान 'श्रीकृष्ण विराजमान' की वादी रंजना अग्निहोत्री आदि के अधिवक्ताओं ने जिला न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा था। भगवान 'श्रीकृष्ण विराजमान' की ओर 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक के लिए विगत 13 अक्तूबर को जिला जज मथुरा की अदालत में अपील की गई थी। जिला जज ने दावे को दाखिल करने संबंधी मामले में फैसले को सुरक्षित कर लिया था। और 16 अक्तूबर को इस संबंध में निर्णय देने के लिए तारीख दी थी।

सिविल कोर्ट में खारिज हो गया :- इससे पूर्व यह दावा सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में किया गया था। उनकी अनुपस्थिति में इसकी सुनवाई लिंक कोर्ट एडीजे-पॉक्सो कोर्ट में हुई। जहां अदालत ने यह दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद भगवान 'श्रीकृष्ण विराजमान' द्वारा दावे की अपील विगत सोमवार को जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत में की गई। भगवान 'श्रीकृष्ण विराजमान' की ओर से अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और पंकज कुमार वर्मा ने दावा दाखिल करने के लिए अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।

इतिहास के बारे में बताया :- वकीलों ने सबसे पहले उक्त जमीन के इतिहास की जानकारी दी। फिर उन्होंने 02 अक्तूबर 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा 13.37 एकड़ जमीन पर कमेटी ऑफ मैनेजमेट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के साथ हुए समझौते को गैरकानूनी बताया। कहा कि इसके बाद 1973 में डिक्री (न्यायिक निर्णय) किया गया था। वकीलों ने बताया कि वह उस न्यायिक निर्णय को रद्द कराना चाहते हैं।