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राधा अष्टमी पर विशेष: सेवाकुंज जहां भगवान कृष्ण ने दबाया था राधारानी का पैर

-हर रात राधा और कृष्ण रचाते हैं रास, रात में यहां रुक गया कोई तो हो जाता है पागल.

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Radha ashtami

Radha ashtami

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वृंदावन. भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी का आज जन्मोत्सव है। मथुरा, वृंदावन और बरसाने में राधाअष्टमी की घर-घर पूजा हो रही है। उत्सव का माहौल है। शास्त्रों के अनुसार राधा रानी के पिता नाम वृषभानु और माता का नाम कीर्ति था। राधा जी स्वंय लक्ष्मी जी का अंश थीं। आज की रात वृंदावन के सेवाकुंज में विशेष श्रृंगार किया जाएगा। पुजारी फूलों की विशेष सेज लगाएंगे। दातून, लड्डू और पान का बीड़ा भी रखा जाएगा। लेकिन, रात में कृष्ण और राधा के रास को देखना मना है। इसलिए पुजारी भक्तों को आगाह कर रहे हैं। जगह-जगह भक्तों को इस संबंध में चेतावनी दी जा रही है। कहतें हैं भगवान को रास रचाते देख लेने के बाद व्यक्ति पागल हो जाता है। हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है। बस विश्वास है। इसी विश्वास पर दुनियाभर के लोग यहां आते हैं। हालांकि इस साल कोरोना की वजह से यह उत्सव फीका है।

श्रीकृष्ण प्रियतम और राधा रानी प्रिया-
सेवाकुंज के सेवाधिकारी आचार्य श्री राधाकुमुद जी महाराज बताते हैं कि वृदांवन के सेवाकुंज में बने राधा-कृष्ण मंदिर में आज भी हर रात राधा रानी और कृष्ण रास रचाने आते हैं, पुजारी हर शाम उनके लिए फूलों की सेज लगाते हैं। रात के वक्त इन मंदिरों में कोई नहीं रहता। भूल से भी कोई रुक गया तो वह पागल हो जाएगा, रात में उसने क्या देखा किसी को कुछ बताने लायक नहीं रहता। पुजारी कहते हैं कि वृंदावन ही भगवान कृष्ण का बचपन गुजरा। आज भी वृंदावन के इस इलाके में मंदिर तो हैं तो लेकिन यह वन जैसा लगता है। तुलसी, तमाड़ और पीलू के वृक्ष लगे हैं। इनकी लताएं फैली हैं। बंदरों की यहां भरमार है। इसी सुरम्य जगह पर है सेवाकुंज। कहते हैं कि जब राधा रानी रास रचाते वक्त थक गईं थीं तो भगवान ने उनका पैर दबाया था, इसीलिए इसे सेवाकुंज कहते हैं। सेवा कुंज में आज भी श्री कृष्ण और राधा रास रचाने आते हैं। यहां श्री कृष्ण प्रियतम हैं और राधा रानी प्रिया हैं।

निधिवन मंदिर जहां राधा ने चुराई थी कृष्ण की बंसी
यहीं वृंदावन में निधिवन मंदिर भी है। यह झाड़ीनुमा जंगल के बीच में है। यहां भी खूब चहल पहल है। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए भक्त अपने आराध्य की पूजा में लीन हैं। निधिवन के बारे में पुजारी बताते हैं कि यहां भी रात में कृष्ण और राधा रास रचाते हैं। मान्यता है कि यहां राधा रानी ने भगवान कृष्ण की वंशी चुराई थी। क्योंकि राधा बंसी की मधुर तान को सुनकर खुद को रोक नहीं पाती थीं। इन दोनों मंदिरों में कृष्ण को भगवान, पालन हार या विष्णु के अवतार के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रेमी के तौर पर पूजा जाता है।