
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद शरण महाराज से मुलाकात की। इस दौरान संघ प्रमुख ने राष्ट्र की आगामी स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की तो प्रेमानंद शरण महाराज ने उनको भगवान श्रीकृष्ण पर भरोसा करने और राष्ट्रसेवा को भगवान सेवा समझकर करने को कहा।
बातचीत में भागवत ने कहा कि आपको वीडियो में सुना तो लगा कि एक बार देख लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाह गई, चिंता गई ऐसे लोग कम मिलते हैं। इस बात पर प्रेमानंद महाराज हंस दिए।
इसके बाद प्रेमानंद शरण महाराज ने कहा कि देखिए, अपने लोगों का जन्म जो भगवान ने दिया है, वह केवल सेवा के लिए है। व्यवहार की सेवा और आध्यात्म की सेवा, ये दोनों सेवाएं अति अनिवार्य हैं। केवल बाहर की सेवा होती रहे।
बौद्धिक स्तर का गिरना चिंताजनक
हम अपने भारतवासियों को परम सुखी करना चाहते हैं, तो केवल वस्तु या व्यवस्था से नहीं कर सकते, उनका बौद्धिक स्तर भी सुधरना चाहिए। आज हमारा बौद्धिक स्तर गिरता चला जा रहा है। बहुत चिंता का विषय है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अपनी शिक्षा केवल आधुनिक रूप लेती जाए और व्यभिचार-व्यसन प्रवृत्ति देखकर बहुत असंतोष होता है। इसलिए शरीर में कितनी भी पीड़ा हो, लेकिन हमारा प्रयास होता है कि जितने भी भगवत स्वरूप आते हैं, उनकी बुद्धि शुद्ध हो।
प्रेमानंद ने कहा कि अविनाशी जीव कभी भोग विलास में तृप्त हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जितने राम कृष्ण हमें प्रिय हैं, वैसे ही देश भी हमें प्रिय है।
विचार शुद्ध नहीं हुए तो राष्ट्र संकट में पड़ जाएगा
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हमारा राष्ट्र संकट में पड़ जाएगा, यदि हमारे विचार शुद्ध नहीं हुए, बुद्धि शुद्ध नहीं हुई। चाहे जितना भजन एकांत में कर लो, उसके भजन की सिद्धि समाज सुधार में लगेगी अन्यथा कोई खास बात नहीं। उन्होंने कहा कि व्यसन छोड़ो, व्यभिचार छोड़ो। उन्होंने चिंता जताई कि राष्ट्र सेवा में लगे बड़े बुजुर्गों को लोग घर से निकाल रहे हैं।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि उनका उद्देश्य है कि देशवासियों का विचार शुद्ध हो। राष्ट्रप्रियता, देशसेवा, जनसेवा ये सब स्वाभाविक रूप से होने लगेगा। यदि विचार अशुद्ध है तो सुविधाओं का दुरुपयोग होगा।
हम निराश नहीं होंगे, पर चिंता जरूर: भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि नोएडा में भाषण हुआ तो वहां स्वआधार पर भारत के विकास की यही बातें रखीं। भागवत ने आगे कहा कि आप लोगों से जो सुनते हैं, वही बोलते हैं और करते हैं। हम भी कर रहे हैं और आप भी कर रहे हैं, तो ये बातें बढ़ तो रहीं हैं। निराश तो हम होंगे ही नहीं परंतु क्या होगा इसकी चिंता मन में जरूर आती है।
Published on:
29 Nov 2023 08:08 pm
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