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मंदिरों में चढ़ने वाला हजारों लीटर दूध हो रहा बर्बाद, Recycling Project डंप

मंदिरों में चढ़ने वाले दूध के संग्रह न होने के कारण बारिश के मौसम में समस्या का सामना भी करना पड़ता है। इसे Recycle करने के लिए Project बना लेकिन फाइलें में दब कर रह गया।

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Amit Sharma

Jul 16, 2017

Govardhan Mandir

Govardhan Mandir

मथुरा।
Sawan के महीने में देश के तमाम प्रान्तों से श्रद्धालुओं का Brij में आना शुरु हो गया है। ऐसे में ब्रज के प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने के साथ ही श्रद्धालु Govardhan में गिरिराज पर्वत की 21 किलोमीटर की Parikrama करना नहीं भूलते। इस दौरान यहां Giriraj Ji के मंदिरों में दूध भी चढ़ाते हैं। मंदिरों में चढ़ने वाले दूध के संग्रह न होने के कारण बारिश के मौसम में समस्या का सामना भी करना पड़ता है।


प्रतिदिन हजारों लीटर चढ़ता है दूध

Govardhan के गिर्राज जी मंदिर में विग्रह चढ़ने के बाद नालियों में सड़ने वाला यह दूध बारिश के मौसम में तमाम सक्रांमक रोग भी फैला सकता है। यहां के लोगों को इसका डर सता रहा है। हालांकि मंदिरों में चढ़ने वाले इस दूध को इकट्ठा कर इसकी रिसाइकिलिंग के लिए Food Department ने प्लान भी तैयार किया था लेकिन खाद्य विभाग का यह प्रोजक्ट केवल फाइलों में ही दब कर रह गया।




नालियों में बहता है दूध

गोवर्धन में Giriraj Shila पर प्रतिदिन चढ़ने वाला दूध नालियों में बह कर बर्बाद होता है। इसकी रिसाइकिलिंग कर उसे पशुओं के उपयोग में लाने के लिए खाद्य विभाग ने प्रोजेक्ट तैयार किया था। खाद्य विभाग की टीम ने Govardhan Parikrama में स्थित दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा, मुखारबिंद मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा रोज चढ़ाए जाने वाले दूध को नालियों में ना बहा कर टैंकों में एकत्रित कर उसको शोधित करने की योजना तैयार की थी। इस दूध को एकत्रित करने के लिए एक कुआं बनवाया गया लेकिन हर दिन कई कुंतल दूध गिर्राज जी विग्रह के साथ साथ कई मंदिरों का दूध नालियों में बह रहा है। अधिक दिन होने की वजह से ये दूध सड़ने लगता है यहां से आने और जाने वाले हर व्यक्ति को इसकी बदबू से गुजरना पड़ता है।


देखें वीडियो


पलट कर नहीं आए अधिकारी

सीता राम और अमित गोस्वामी ने बताया कि हर दिन गोवर्धन में लाखों श्रद्धालु आते हैं और दूध चढ़ाते हैं। प्रशासन ने Milk Recycling के लिए प्रस्ताब पास किया था। एक बार अधिकारी आये और उसके बाद आज तक कोई भी अधिकारी इसकी सुध लेने नहीं आया।


फाइलों में दब कर रह गया प्रोजेक्ट

आपको बता दें की करीब एक साल पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल (NDRI) के विशेषज्ञों की टीम भी यहां का निरीक्षण कर प्रशासनिक अफसरों के साथ मीटिंग कर चुकी है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए पूरा खाका तैयार कर खाद्य विभाग ने विकास प्राधिकरण को सौंपा था लेकिन तक से अब तक करीब एक साल बीतने के बाद भी यह प्रोजेक्ट फाइलों से निकलकर धरातल पर नहीं आ सका है। खाद्य विभाग के अधिकारी चंदन पांडेय ने बताया कि हमने इस योजना का बेसिक प्रारुप तैयार कर विकास प्राधिकरण को सौंप दिया था।