गोवर्धन में Giriraj Shila पर प्रतिदिन चढ़ने वाला दूध नालियों में बह कर बर्बाद होता है। इसकी रिसाइकिलिंग कर उसे पशुओं के उपयोग में लाने के लिए खाद्य विभाग ने प्रोजेक्ट तैयार किया था। खाद्य विभाग की टीम ने Govardhan Parikrama में स्थित दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा, मुखारबिंद मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा रोज चढ़ाए जाने वाले दूध को नालियों में ना बहा कर टैंकों में एकत्रित कर उसको शोधित करने की योजना तैयार की थी। इस दूध को एकत्रित करने के लिए एक कुआं बनवाया गया लेकिन हर दिन कई कुंतल दूध गिर्राज जी विग्रह के साथ साथ कई मंदिरों का दूध नालियों में बह रहा है। अधिक दिन होने की वजह से ये दूध सड़ने लगता है यहां से आने और जाने वाले हर व्यक्ति को इसकी बदबू से गुजरना पड़ता है।