
मथुरा। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जगदगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज 10 दिवसीय प्रवास पर वृंदावन आए हुए हैं। वृन्दावन के चैतन्य विहार स्थित शंकराचार्य आश्रम पर स्वामी निश्चलानंद महाराज मीडिया से रूबरू हुए। इस दौरान स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने राजनेति को दिशाहीन होने के लिए सभी दलों को नेताओं को जिम्मेदार ठहराया साथ ही उन्होंने राम मंदिर को लेकर भी बड़ा दिया है।
दिशाहीन राजनीति के लिए राजनेता जिम्मेदार
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि धर्म और अध्यात्म विहीन राजनीति स्वतंत्रता के बाद से अब तक भारत में क्रियान्वित है, इसलिए राजनीति में दिशाहीनता स्वाभाविक है। सत्ता लोलुपता और अदूरदर्शिता के कारण राजनीति में दिशाहीनता है। विज्ञान के युग में भी सनातन वैदिक आर्य सिद्धांत सर्वोच्च है। शंकराचार्य ने कहा कि वेद आदि में सन्निहित राजनीति को देश काल और परिस्थिति के अनुसार परिभाषित करें तो पूरे विश्व के हित में राजनीति हो सकती है। उन्होंने राजनीति की वैदिक परिभाषा बताते हुए कहा कि सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, सम्पन्न, सेवा परायण, स्वच्छ व्यक्ति और समाज की संरचना राजनीति का उद्देश्य होना चाहिए। राजनेताओं को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री कितने भी ईमानदार क्यों न हों लेकिन जब राजनीति में धर्म और अध्यात्म का प्रवेश नहीं है तो राजनीति में दिशाहीनता स्वाभाविक है। शंकराचार्य ने कहा मैं किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं हूं लेकिन शंकराचार्य होते हुए राग द्वेष से रहित होकर सिद्धांतिक धरातल पर समीक्षा करना, उचित मार्गदर्शन देना मेरा काम है। हमारी दृष्टि में भारत में कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं जो सत्ता लोलुपता और अदूरदर्शिता की चपेट में न हो।
ढाई हजार वर्ष पुरानी है शंकराचार्य की गद्दी
फर्जी शंकराचार्य को लेकर कहा कि जब देश में नकली प्रधानमंत्री नहीं है, नकली राष्ट्रपति नहीं है तो फिर नकली शंकराचार्य कैसे बन रहे हैं। अंग्रेजों के शासन में नकली शंकराचार्य नहीं थे लेकिन स्वतंत्र भारत में नकली शंकराचार्य पनप रहे हैं। जबकि शंकराचार्य का सबसे ऊंचा पद है, ढाई हजार वर्ष पुरानी गद्दी है हमारी। राजनेताओं को दोषी बताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि राजनेता, अराजक तत्वों को भी शंकराचार्य के रूप में स्थापित कराने में सहभागिता का परिचय देते हैं। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की नियुक्ति को लेकर उन्होंने कहा कि शंकराचार्य बनाने का अधिकार शंकराचार्यों को ही है किसी परिषद को नहीं है।
राष्ट्रभक्ति पर प्रश्नचिन्ह
राम मंदिर निर्माण को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि यदि उन्होंने नरसिम्हाराव के शासन काल में ही हस्ताक्षर कर दिए होते तो अब तक मंदिर का विवाद मिट गया होता और आज राम लला तंबू में नहीं होते। उन्होंने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल जैसा मनोबल भारत के किसी प्रधानमंत्री में नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि मोदी ने राम मंदिर को लेकर न तो उनसे चर्चा की है और न ही अन्य संतों से।शंकराचार्य ने कहा कि यदि राम मंदिर के आसपास या कहीं दूर भी मज्जिद बनी तो समझ लो कि नए पाकिस्तान बनाने को निमंत्रण दिया जाएगा, संत या नेता और उन सभी की राष्ट्र भक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगेगा।
Published on:
27 Sept 2017 07:53 pm
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