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बिहारी जी के इस मंदिर में ​लगता है मिट्टी के पेड़े का भोग, बड़े चाव से खाते हैं श्रद्धालु

पेड़े के लिए प्रसिद्ध मथुरा नगरी में मावे के पेड़े तो बहुत खाए होंगे, कभी मिट्टी के पेड़े भी खाकर देखिए।

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मथुरा। मथुरा के पेड़े का नाम दुनियाभर में प्रचलित है जो भी यहां आता है, पेड़े साथ ले जाना नहीं भूलता। लेकिन क्या आपने यहां कभी मिट्टी के पेड़े खाए हैं? अगर नहीं तो अबकी बार ब्रह्मांड बिहारी के मंदिर जरूर जाइएगा। ब्रह्मांड बिहारी मंदिर गोकुल स्थित यमुना के ब्रह्मांड घाट पर बना है। यहां भगवान को मिट्टी से बने पेड़े का भोग लगाया जाता है। दूर दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं और मिट्टी के पेड़े बड़े चाव से खाते हैं।

इसी स्थान पर श्रीकृष्ण ने यशोदा मां को कराए थे ब्रह्मांड दर्शन
कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां बचपन में कान्हा ने मिट्टी खाकर यशोदा मां को अपने मुंह में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। इस स्थान पर कन्हैया का ब्रह्मांड बिहारी के नाम से मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में आज भी उन्हें मिट्टी के पेड़े का भोग लगाया जाता है। मंदिर के पुजारी पवन ने बताया कि भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में लोगों को वितरित किया जाता है और भक्त इन्हें बड़े चाव से खाते हैं। मान्यता है कि यदि कोई बच्चा मिट्टी खाता है और उसे ये पेड़ा खिला दिया जाए तो वो मिट्टी खाना छोड़ देता है।

यमुनाघाट की मिट्टी से बनते पेड़े
इन पेड़ों को बनाने के लिए बरसात के मौसम में यमुनाघाट से मिट्टी निकलवाई जाती है। उसे सुखाया जाता है फिर कूटा और छाना जाता है। इसके बाद मिट्टी के पेड़े तैयार किए जाते हैं।

रोजाना बिक जाते हैं सैकड़ों पेड़े
पुजारी ने बताया कि यहां रोजाना करीब हजार से दो हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और रोजाना सैकड़ों पेड़ों की बिक्री होती है। इन पेड़ों को देसी—विदेशी सभी भक्त स्वाद लेकर खाते हैं। पेड़ो की बिक्री से हुई आय को गौ सेवा और बिहारी जी की सेवा में लगाया जाता है।