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महागठबंधन को हेमा मालिनी का डर, उनके कद का प्रत्याशी तलाशने में छूट रहे पसीने

राष्ट्रीय लोकदल के कोटे में आई है मथुरा लोकसभा सीट, मथुरा से बीजेपी सांसद हेमा मालिनी के विरुद्ध स्थानीय प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने की घोषणा के बाद दावेदार सक्रिय

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hema

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मथुरा। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए दंगल सज गया है। कान्हा की नगरी में इस बार लोकसभा चुनाव से पहले का परिदृश्य बेहद रोचक बना हुआ है। महागठबंधन की सीट राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के कोटे में आई है। रालोद के युवराज जयंत चौधरी मथुरा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। इस बार वह मथुरा से चुनाव लड़ने नहीं जा रहे। इसके बाद दावेदारों के लिए यह सीट खुला दंगल बन गई है।

आलाकमान को जल्दी नहीं
महागठबंधन से टिकट मांग रहे एक दर्जन से अधिक लोग अब तक सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं एक प्रतिनिधिमंडल भी हाल ही में दिल्ली में जयंत चैधरी से मिल कर इस बात का आश्वासन लेकर लौटा है कि इस बार प्रत्याशी स्थानीय ही होगा। जातीय समीकरणों से लेकर आर्थिक स्थिति और जनता के बीच स्वीकार्यता एवं सक्रियता जैसे तमाम स्तरों पर दावेदारों को आकलन कर रही है। लोकसभा चुनाव 2019 में रालोद का लोकसभा में खाता नहीं खुला था। खुद जयंत चौधरी मथुरा लोकसभा सीट पर चुनाव वर्तमान सांसद हेमामालिनी के सामने बड़े अंतर से हार गये थे। इस बार पार्टी किसी भी कीमत पर अपने कोटे की तीनों सीटें जीतना चाहती है। यही वजह है कि आलाकमान किसी तरह की कोई जल्दबाजी करता नहीं दिख रहा है।

एचपी सिहं परिहार, संजय लाठर हो सकते हैं विकल्प
महागठबंधन को ऐसे प्रत्याशी की जरूरत है जो स्थानीय होने के नाते राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान रखता हो। ऐसे में जाट आरक्षण के लिए लम्बी लडाई लडने वाले एसपी सिंह परिहार अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वह मूलरूप से बल्देव क्षेत्र के रहने वाले और देश भर में जाट नेता के रूप में पहचान रखते हैं। मांट विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ चुके और सपा का जनाधार नहीं होने के बाद भी कड़ी टक्कर देने वाले संजय लाठर भी एक विकल्प हो सकते है। सूत्रों का कहना है कि संजय लाठर पर भी महागठबंधन विचार कर सकता है। गठबंधन से पहले संजय लाठर का नाम भी सपा प्रत्याशी के तौर पर खूब उभर कर आया था।

जातीय समीकरण ही नहीं, हेमा का कद भी है चुनौती
महागठबंधन यह मानकर चल रहा है कि वर्तमान सांसद हेमा मालिनी को ही भाजपा मथुरा से चुनाव लड़ाने जा रही है। अगर ऐसा नहीं होता है तो हेमा मालिनी को रिप्लेस करने वाला प्रत्याशी भी उसी स्तर और कद का होगा। ऐसे में उनके कद का प्रत्याशी तलाशना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।