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गोकुल के लंगोटी कुंड में धोई गई थी कान्हा की लंगोटी, देखें वीडियो

लंगोटी कुंड के पंडित रामबाबू ने बताया कि यहां एक पेड़ भगवान श्रीकृष्ण के समय का है। यहां जो भी सच्चे मन से चूनर या धागा बांध कर जाता है, उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

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langoti kund

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मथुरा। यूं तो ब्रज में कृष्ण लीला से जुड़े सैकड़ों कुंड हैं, लेकिन गोकुल, जहां भगवान श्रीकृष्ण का लालन पालन हुआ, वहां एक ऐसा कुंड है जिसे लंगोटी कुंड के नाम से जाना जाता है। इस कुंड के बारे में धार्मिक मानता है कि जन्म के छठे दिन से मईया यशोदा ने अपने लाड़ले कन्हैया की लंगोटी और अन्य वस्त्र इसी कुंड में धोए थे। आज भी इस कुंड के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु गोकुल आते हैं।

ये है मान्यता

मथुरा से करीब 25 किलोमीटर दूर बसा है गोकुल। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपरांत यमुना नदी पार करके वासुदे, नन्द बाबा के यहाँ छोड़कर गए थे। भगवान की बाललीलाओं में से एक है लंगोटी कुंड। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की लंगोटी इसी कुंड में धोई गयी थी। लंगोटी कुंड के पंडित रामबाबू ने बताया कि आस-पास के गांव में जो बच्चा होता है, उसकी भी लंगोटी इसी कुंड में धोई जाती है। यहां एक पेड़ भगवान श्रीकृष्ण के समय का है। यहां जो भी सच्चे मन से चूनर या धागा बांध कर जाता है, उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

क्या कहा महिला श्रद्धालु ने

दिल्ली से आई महिला श्रद्धालु अंजली मिश्रा ने बताया की हम लोग यहाँ पहली बार आए हैं। बृज के बारे में बहुत सुना था और यहाँ के मंदिर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। सुबह भगवान बांके बिहारी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। अब गोकुल में आए हैं। हम यहाँ लंगोटी कुंड पर खड़े हैं और पंडित जी ने बताया कि यहाँ भगवान कृष्ण की लंगोटी इसी कुंड में धोई गयी थी। गोकुल में नन्द भवन के दर्शन करके बड़ा अच्छा लगा। मन को शांति मिली। मंदिर में जब हम लोग बैठकर ध्यान कर रहे थे तो ऐसा लगा रहा था कि श्रीकृष्ण हमारे पास खड़े हैं और हमसे कुछ बात करना चाहते हैं।