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इस मंदिर में भगवान को एक टक नजर से देखने की इजाजत किसी को नहीं, जानिए क्यों?

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भगवान से एक टक नजर नहीं मिलाने दी जाती। जानिए मंदिर की मान्यता व अन्य विशेषताएं।

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banke bihari

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मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और प्रेम का असर आज भी दिखता है वृंदावन की गलियों में। मथुरा जंक्शन से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वृंदावन। यहां कृष्ण को श्रीकृष्ण या द्वारिकाधीश नहीं बल्कि कान्हा, बिहारी और बंसी वाले के नाम से पुकारा जाता है। यहां स्थित बांके बिहारी के मंदिर में दुनियाभर से भक्त अपने कान्हा की एक झलक पाने के लिए आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में बांके बिहारी को एक टक नजर से देखने की इजाजत किसी को नहीं है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता और मंदिर से जुड़ी अन्य विशेष बातों को।

बांके बिहारी मंदिर की मान्यता
बांके बिहारी को एक टक नजर से न देखने के पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार राजस्थान के एक राजा बांके बिहारी के दर्शन करने वृंदावन आए और वे भगवान बांके बिहारी की नजरों से नजरें मिलाकर उन्हें एक टक देखते रहे। इसके बाद राजा अपने राज्य वापस चले गए। कुछ देर बाद मंदिर के सेवायतों ने मंदिर में आकर देखा तो वहां भगवान मौजूद नहीं थे। इस घटना से मंदिर के पुजारियों में हड़कंप मच गया। भगवान की स्तुति की गई तो पता चला कि भगवान वहां से अपने भक्त के प्रेम के अधीन होकर वहां से उनके साथ ही चले गए हैं। काफी प्रार्थना के बाद भगवान को मंदिर में फिर से स्थापित किया गया। तब से लेकर आज तक यहां किसी को भी भगवान को एकटक देखने की इजाजत नहीं दी जाती है। सेवायत पुजारी इस बात का विशेष खयाल रखते हैं कि कोई भी भक्त इन्हें लगातार न देख सके। इसके लिए मूर्ति के सामने थोड़ी—थोड़ी देर में पर्दा डाला जाता है।

धातु की नहीं है मूर्ति
मंदिर में मौजूद भगवान कृष्ण की प्रतिमा किसी कारीगर या वास्तु शिल्पकार द्वारा निर्मित नहीं है बल्कि स्वयं उत्पन्न प्रतिमा है। इसकी खासियत ये है कि यह प्रतिमा किसी पत्थर या अन्य धातु से नहीं बल्कि लकड़ी की बनी हुई है।

दर्शन कर नम होती हैं आंखें
बांके बिहारी के दर्शन करने के लिए मुरादाबाद से आयीं महिला श्रद्धालु शिल्की ने बताया कि भगवान के दर्शन करके स्वयं उनकी आंखें नम हो गईं। ऐसा महसूस हो रहा था कि यहीं आकर ठहर जाउं। वे हर साल मंदिर में बांके बिहारी के दर्शन के लिए आती हैं। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को एक बार बांके बिहारी के दर्शन के लिए जरूर आना चाहिए।