
उत्तर भारत के दक्षिण भारतीय शैली के विशालतम रंगनाथ मंदिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव सोमवार से वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के साथ प्रारंभ हुआ। पहले दिन भगवान रंगनाथ माता गोदा (लक्ष्मी जी) के साथ सोने से बनी पुण्य कोटि में विराजमान हुए।
शुभ मुहूर्त में मंदिर के पुरोहित विजय मिश्रा ने महंत गोवर्धन रंगाचार्य महाराज के निर्देशन में ध्वजारोहण की परंपरा निभाई। इस दौरान भगवान गरुड़जी का पूजन पुजारी राजू स्वामी द्वारा संपन्न हुआ। यह पूजन भगवान गरुड़जी के माध्यम से समस्त देवी-देवताओं को ब्रह्मोत्सव की सूचना देने और उत्सव की बागडोर गरुड़जी को सौंपने के उद्देश्य से किया गया। पूजन के बाद सोने से बने स्तंभ पर गरुड़जी की ध्वजा चढ़ाई गई।
ध्वजारोहण से पहले भगवान रंगनाथ के सेनापति विष्वक्सेन का आह्वान और पूजन-अर्चन किया गया। पूजन के बाद विष्वक्सेन को चांदी से बनी पालकी में विराजमान किया गया और परंपरागत वाद्ययंत्रों की ध्वनि के मध्य उन्हें मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के लिए निकाला गया।
Updated on:
18 Mar 2025 09:55 am
Published on:
18 Mar 2025 09:35 am
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