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गुर्जर आंदोलन के योद्धा का अस्ति कलश पहुँचा मथुरा, पुष्प वर्षा कर लोगों ने दी श्रद्धाजंलि

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता रहे किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन शुक्रवार को जयपुर के एक अस्पताल में हो गया। पूर्व कर्नल के निधन की खबर सुन परिवार के साथ साथ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव मुंडिया में उनकी अंत्येष्टि की गई। पंचतत्व में विलीन हुए सेवानिवृत्त किरोड़ी सिंह बैंसला को श्रद्धांजलि देने के लिए अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धांजलि देते वक्त सभी की आंखें नम हो गईं। सोमवार को स्वर्गीय पूर्व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का अस्थि कलश मथुरा पहुंचा।

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Symbolic Photo of Gurjar Andolan

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मथुरा में आंदोलनकारी का अस्थि पहुंचने के बाद यहां के लोगों ने अस्थि कलश पर फूल माला चढ़ाकर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वहीं 10 मिनट की एक शोक सभा भी आयोजित की गई। सभी लोगों ने 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें ईश्वर से अपने श्री चरणों में स्थान देने की कामना की।

स्वर्गीय किरोड़ी सिंह बैंसला की बेटी सुनीता बैंसला और उनके बेटे ने अस्थि कलश यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि गुर्जर आंदोलन का एक पुरोद्धा पंचतत्व में विलीन हो गया। उनका अस्ति कलश गांव मुंडिया से सोरों घाट पर विसर्जित होने के लिए जा रहा है। हम सभी की यह अपील है कि जो इस नेक काम में सम्मिलित होना चाहे वह सम्मिलित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जगह-जगह कर्नल साहब की यादों को ताजा किया जा रहा है और अस्थि कलश के दर्शन कर लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वहीं मोहन गुर्जर ने भी स्वर्गीय पूर्व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

उल्लेखनीय है कि किरोड़ी सिंह बैंसला ने राजस्थान में गुर्जर आंदोलन को लेकर अपनी आवाज बुलंद की और आंदोलन का प्रमुख हिस्सा भी रहे थे। साल 2007 और 2008 में चले इस आंदोलन में पुलिस की गोलीबारी और अन्य हिंसक घटनाओं में 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस आंदोलन का असर भरतपुर, करौली, दौसा व सवाई माधोपुर जिले में भी देखने को मिला था। बैंसला ने 2009 में भारतीय जनता पार्टी से टिकट पर चुनाव भी लड़ा। जिसमें उन्हें मामूली वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

किरोड़ी सिंह बैंसला ने तीन दशक तक भारतीय सेना में रहकर अपनी सेवाएं दी। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध में तथा 1965 में 71 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी खा लिया था। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गुर्जर समाज के लिए शिक्षा व नौकरियों में आरक्षण के लिए काम किया। गुर्जरों के लिए लंबे समय तक आरक्षण के लिए राज्य सरकार से लड़ते रहे। एक नई श्रेणी अति पिछड़ा वर्ग, ( एमबीसी ) सृजित करते हुए गुर्जर रायका, रेवाड़ी, गड़िया, लोहार, बंजारा और गडरिया समाज के लोगों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश दिलाने के लिए 5% का आरक्षण दिलाया था।