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कड़ाके की ठंड भी नहीं डिगा सकी आस्था, मां लक्ष्मी की कृपा पाने को उमड़े हजारों भक्त

लक्ष्मी तपस्थली के रूप में विख्यात बेलवन नामक इस स्थल पर पौष मास में गुरुवार के दिन विशेष पूजा का महत्व है।

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मथुरा

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Mukesh Kumar

Dec 21, 2017

Mahalakshmi Mandir Belvan

Mahalakshmi Mandir Belvan

मथुरा। वृंदावन में पौस माह के तीसरे गुरुवार को यमुना के किनारे स्थित प्राचीन लक्ष्मी मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूरदराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने विधि विधान से मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की। मंदिर में दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं ने भण्डारों में दाल चावल की खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया।

ठंड भी नहीं डिगा सकी आस्था
गुरुवार को घना कोहरा और कड़ाके की ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगा पाई। सुबह तड़के से ही बेलवन में मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हजारों भक्त उमड़ पड़े। मां लक्ष्मी के दर्शनों को सिलसिला शाम तक चला। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर मां लक्ष्मी और भगवान कृष्ण के जयकारों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिर में लक्ष्मी जी के दर्शन कर मनौती मांगी और भण्डारों में दाल चावल की खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया।

ये है मान्यता
लक्ष्मी जी की तपस्थली बेलवन कृष्ण की महारासलीला से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि राधाकृष्ण के महारास में शामिल होने के लिए वैकुंठ से चलकर स्वयं लक्ष्मी जी यहां आई थी। मगर उन्हें वृन्दावन में ही प्रवेश नहीं मिला। इसी से व्याकुल होकर लक्ष्मी जी वृन्दावन के पूर्वी छोर पर यमुना के किनारे तपस्या करने लगी। मान्यता है कि यहां लक्ष्मी जी हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में लीन हैं।


मंदिर के महंत स्वामी दिव्यानंद महाराज ने बताया कि पौष मास के गुरुवार के दिन इस स्थल पर लक्ष्मी जी पूजा करने से विशेष महत्व मिलता है। इस स्थान पर पूजा के साथ खिचड़ी का भोग लगाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं। इसीलिे पौष मास के गुरुवार को भक्तों की खासी भीड़ होती है।

मंदिर परिसर में ठीक नहीं थी व्यवस्था
बेलवन में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी, लेकिन व्यवस्था दुरुस्त न होने से श्रद्धालुओं को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। खासकर महिलाएं काफी परेशान दिखीं। अंशु वार्ष्णेय नामक की महिला श्रद्धालु ने कहा कि यहां कोई इंतजाम नहीं किया गया। जिससे उन्हें दिक्कतों को सामना करना पड़ा। मंदिर परिसर और बाहर पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन ज्यादातर ड्यूटी के बजाय बैठे नजर आए।