
नवंबर, दिसंबर और जनवरी के विवाह मुहूर्त
मथुरा। यदि कुंडली के सप्तम भाव में कोई पाप योग (गुरु–चांडाल योग, ग्रहण योग अंगारक योग आदि) बना हुआ हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और बाधाएं उपस्थित होती हैं। यदि सप्तम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनती है। राहु–केतु का सप्तम भाव में शत्रु राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बनता है। यदि सप्तम भाव के आगे और पीछे दोनों और और पाप ग्रह हो तो यह भी वैवाहिक जीवन में बाधायें उत्पन्न करता है। सप्तमेश का पाप भाव (6,8,12) में बैठना या नीच राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में उतार चढ़ाव का कारण बनता है।
पुरुष की कुंडली में शुक्र का प्रभाव
पुरुष की कुंडली में शुक्र नीच राशि (कन्या) में हो, केतु के साथ हो, सूर्य से अस्त हो, अष्टम भाव में हो या अन्य किसी प्रकार पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष उत्पन्न होता है। स्त्री की कुंडली में मंगल नीच राशि (कर्क) में हो, राहु शनि से पीड़ित हो बृहस्पति नीचस्थ हो राहु से पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में बाधायें और वाद विवाद उत्पन्न होते हैं। पाप भाव (6,8,12) के स्वामी यदि सप्तम भाव में हो तो भी वैवाहिक जीवन में विलम्ब और बाधाएं आती हैं। सप्तम में शत्रु राशि या नीच राशि (तुला) में बैठा सूर्य भी वैवाहिक जीवन में बाधायें और संघर्ष देता है।
विशेष– यदि पीड़ित सप्तमेश, सप्तम भाव, शुक्र और मंगल पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में वैवाहिक जीवन की समस्याएं अधिक बड़ा रूप नहीं लेती और उनका कोई ना कोई समाधान व्यक्ति को मिल जाता है। वैवाहिक जीवन की समस्याएं अधिक नकारात्मक स्थिति में तभी होती हैं। जब कुंडली में वैवाहिक जीवन के सभी घटक पीड़ित और कमजोर हो और शुभ प्रभाव से वंछित हों।
कभी कभी किसी जन्मकुंडली में द्विविवाह का योग
कभी-कभी किसी जन्मकुंडली में द्विविवाह योग होता है, जिसके फलस्वरूप जातक या जातका का वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है। ऐसे में दोनों को पुनः छोटे से रूप में पंडित से विवाह रस्म करवाना चाहिए। विवाह शुभ मुहूर्त या लग्न में ही करना चाहिए, अन्यथा दाम्पत्य जीवन के कलहपूर्ण होने की प्रबल संभावना रहती है। यदि ऐसा नहीं हुआ हो अर्थात यदि विवाह शुभ मुहूर्त या शुभ लग्न में नहीं हुआ हो, तो विवाह की तिथि व समय का विद्वान ज्योतिषाचार्य से विश्लेषण करवाना चाहिए और शुभ मुहूर्त या लग्न में पुनः विवाह करना चाहिए।
जब पति पत्नी के संबंधों में आए कटुता
ज्योतिषाचार्य दीपक शुक्ला का कहना है कि पारिवारिक सुख की प्राप्ति के लिए यदि पति-पत्नी के संबंधों में कटुता आ जाए, तो पति या पत्नी, या संभव हो, तो दोनों, ऊपर वर्णित मंत्र का पांच माला जप 21 तक प्रतिदिन करें। जप निष्ठापूर्वक करें, तनाव दूर होगा और वैवाहिक जीवन में माधुर्य बढ़ेगा। मंगल दोष के कारण वैवाहिक जीवन में कलह या तनाव होने की स्थिति में निम्नोक्त क्रिया करें। पति या पत्नी, या फिर दोनों, मंगलवार का व्रत करें और हनुमान जी को लाल बूंदी, सिंदूर व चोला चढ़ाएं। तंदूर की मीठी रोटी दान करें। मंगलवार को सात बार एक-एक मुट्ठी रेवड़ियां नदी में प्रवाहित करें। गरीबों को मीठा भोजन दान करें। मंगल व केतु के दुष्प्रभाव से मुक्ति हेतु रक्त दान करें। चांदी का जोड़ विहीन छल्ला धारण करें।
पति पत्नी के बीच प्रेम कम होने का कारण वास्तु दोष भी
जब दंपत्ति एक ही बेड पर दो अलग-अलग गद्दे का उपयोग करते हैं तो उनके बीच होने वाला मतभेद बढ़ने की संभावना और अधिक हो जाती है।पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए पलंग को कभी भी घर के बीम के नीचे नहीं लगाना चाहिए। बीम अलगाव का प्रतीक माना जाता है जो रिश्तों में दूरियां लाता है।
नवविवाहित दंपत्ति को संतान प्राप्ति तक वायव्य यानी उत्तर पश्चिम या उत्तर दिशा के मध्य के शयन कक्ष में सोना चाहिए। इससे प्रेम बढ़ता है और जल्दी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है।
पति पत्नी के संबधों में मजबूती के लिए बैडरूम की दीवारों को गुलाबी या पीले रंग से कलर करवाना चाहिए। छत पर यदि लोहे की गर्डर लगी हो तो उसके नीचे बैड नहीं लगाना चाहिए।
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए घर में रोजाना या कम से कम सप्ताह में एक बार नमक मिले पानी का पौछा अवश्य लगाएं।
यदि पति पत्नी में ज्यादा कलह रहता है तो घर के लिए आटा शनिवार को ही पिसवाएं या खरीदे। इस आटे में यदि कुछ पिसे काले चने का आटा भी मिला सके तो ज्यादा शुभ परिणाम सामने आते है।
पति-पत्नी जिस कमरे में सोते है उस कमरे में ड्रेसिंग टेबल नहीं होना चाहिए। यदि ड्रेसिंग टेबल उसी कमरे में रखना पड़े तो उससे इस प्रकार रखे की सोते और उठाते समय उस पर नजर ना पड़े।यदि ऐसा करना अनिवार्य हो तो
संकलन:
दीपक शुक्ला
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+917000346173
Published on:
25 Nov 2018 08:40 am
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