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Video में देखिए बरसाना की रंगीली गली, रोचक है इतिहास, यहीं लट्ठमार होली खेलेंगे योगी आदित्यनाथ

कान्हा के सखाओं ने राधा की सखियों के साथ हास-परिहास और शरारत की तो उन पर लाठियां बरसाई गईँ।

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मथुरा। बरसाना की तंग गलियों में शताब्दियों प्राचीन होली आज भी जीवंत है। रंगीली गली की होली के तो कहने ही क्या। लट्ठमार होली का केन्द्र है रंगीली गली। यहां आकर हर कोई स्वयं को धन्य मानता है। रंगीली गली में ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होली खेलने आ रहे हैं। रंगीली गली का इतिहास बड़ा रोचक है।

 

द्वापर युग से जुड़ी है कहानी

रंगीली गली करीब 100 मीटर लंबी है। कहा जाता है कि द्वापर युग में जब कन्हैया होली खेलने आए तो राधा की सखियों ने इसी गली में रंग बरसाया था। जब कान्हा के सखाओं ने राधा की सखियों के साथ हास-परिहास और शरारत की तो उन पर लाठियां बरसाई गईँ। तभी से इसे रंगीली गली के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि लट्ठ बरसाने में भी प्रेम छिपा हुआ था। यह परंपरा आज भी चली आ रही है। लाठियां खूब बरसाई जाती हैं, लेकिन किसी को चोट नहीं लगती है। यह हुरियारे और हुरियारिनों के बीच संगत का कमाल है।

 

एक और कहानी

बुजुर्ग बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अंग्रेज कलेक्टर जॉन एफ ग्राउस ने रंगीली गली में लाठियां चलती देखीं तो वह चिन्तित हो गया। उसने अनहोनी की आशंका के चलते लठामार होली रुकवा दी थी। फिर उसे लगा कि यह तो एक खेल है, और उसने फिर से लठामार होली चालू करा दी। रंगीली गली के लोग दुनियाभर में रह रहे हैं, लेकिन होली खेलने जरूर आते हैं। रंगीली गीली में करीब 600 देहरियां हैं।