
Drinking water crisis may increase in summer
मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा में अबकी बार किसानों के सामने एक नई समस्या पैदा हो गोवर्धन विकास खंड के गॉव रसूलपुर में किसान अच्छी पैदावार न होने के कारण परेशान है। किसानों ने अपने खेत के पानी की जांच मथुरा स्थित उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान (वेटरनरी विश्वविद्यालय) में करवाई। पानी की जांच होने के बाद वहां चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में खेत के पानी का टीडीएस (टोटल डिजॉलव्ड सॉलिड) 2600 आया है, जिससे किसान के होश उड़ जाते है। 2600 टीडीएस वाला पानी खेती के लिए तो उपयोगी है ही नहीं।
खेती के लिए पानी का टीडीएस 700 होना चाहिए
पानी का जांच कराने वाले किसान दिनेश चंद्र ने बताया कि मानकों कर अनुसार खेती के लिए पानी का टीडीएस 700 होना चाहिए। वैज्ञानिक ने सलाह दी कि वह अपने खेत की मिट्टी का स्वास्थ्य ठीक करे। खेत के पानी का टीडीएस कम करने के लिए बड़े आरओ प्लांट लगवाए जा रहे हैं। सरकार अनुदान देती है। पहले किसान को अपनी पास से 2 से ढाई लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। आमदनी के हिसाब से किसान इतने रुपए खर्च करने में असमर्थ है। अगर किसान आरओ प्लांट लगवाता है तो उसे फिर कर्ज के बोझ तले दबना पड़ेगा ।
कम पानी की फसल उगाये किसान
पानी की जांच करने वाले वैज्ञानिक डॉ. रविन्द्र कुमार ने बताया कि मथुरा में किसानों के द्वारा खेतों के वाटर सैंपल का टीडीएस औसतन 2000 से 2500 है, जो खेती के लिए बहुत नुकसानदायक है। अगर किसान इस पानी से लगातार खेती होगी, तो करीब तीन साल बाद खेत कोई भी फसल उगाने लायक नहीं रहेगा। किसानों से अपील की है किसान कम पानी की फसल उगाएं। किसान ऑर्गेनिक खेती की तरफ ज्यादा ध्यान दें। ज्यादा टीडीएस से पानी से उगाई गयी सब्जियां भी नुकसान करती है
Published on:
21 Dec 2018 07:03 pm
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