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हरिद्वार कुम्भ से पहले वृन्दावन में कुम्भ लगने की क्या है परम्परा

- वृन्दावन में क्यों किया जाता है कुम्भ का आयोजन - क्या है वृन्दावन में लगने बाले कुम्भ की परम्परा - हरिद्वार से पहले लगता है वृन्दावन में कुम्भ

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मथुरा

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arun rawat

Feb 19, 2021

वृन्दावन कुम्भ मेले में आये साधू शरीर पर भस्म लगाते हुए - फ़ोटो - पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क 

वृन्दावन कुम्भ मेले में आये साधू शरीर पर भस्म लगाते हुए - फ़ोटो - पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क 

निर्मल राजपूत

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क मथुरा. हरिद्वार कुंभ मेले के आयोजन से पहले धर्म नगरी वृंदावन में कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक का आयोजन चल रहा है। देश के कोने-कोने से संत वृंदावन पहुंचकर कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक का हिस्सा बन रहे हैं। वृंदावन में लगने वाले कुंभ मेले की क्या परंपरा है और वृंदावन में कुंभ मेले का आयोजन क्यों होता है आज हम आपको बताएंगे।

बता दें कि यमुना तट पर यह 12 वर्ष में एक बार बसंत पंचमी से यमुना किनारे लगने बाले कुम्भ मेले का आयोजन किया जा रहा है। मान्यता है कि वृंदावन राधा-कृष्ण के प्रेम की भूमि है। यहां रसिक भाव से वैष्णव मत के साधु संत अपने अराध्य की पूजा अर्चना करते हैं। वृंदावन में इस वैष्णव कुंभ में शैव (नागा) संन्यासी नहीं आते हैं। बसंत पंचमी को धार्मिक अनुष्ठान के साथ यमुना किनारे ध्वजारोहण का कार्यक्रम हुआ जिसमें तीनों अनि अखाड़ों में ध्वजा रोहण किया। ध्वजा रोहण में निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास, दिगंबर अनी अखाड़ा के श्रीमहंत कृष्णदास, निर्मोही अनी अखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्रदास के साथ ही अन्य साधु संत भी मौजूद रहे।ध्वजारोहण के बाद यमुना किनारे कुम्भ को शुरुआत हो गई है और यहां 28 मार्च तक कुम्भ का आयोजन चलेगा।

Report - Nirmal Rajpoot