
बचाव और जागरूकता है बेहद जरूरी–सीएमओ
मऊ. शहरों के साथ ही गांवों में भी डेंगू बुखार तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में कई मरीजों के दाखिले की बातें भी सामने आ रहा है। लेकिन इससे बचाव के लिए आपकी बेहतर समझदारी और सुझाव काम आ सकती है।
डेंगू एडीज़ मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने के पाँच से छह दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं। डेंगू के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक ‘हड्डियों का दर्द’ है। इस कारण से डेंगू को 'हड्डी तोड़ बुखार' के नाम से भी जाना जाता है। डेंगू, खासतौर पर बारिश के मौसम के दौरान और बाद में होता है, क्योंकि इसी मौसम में एडीज़ मच्छरों को पनपने के लिए भरपूर पानी मिलता है। इस समय डेंगू तेजी से फैल रहा है लेकिन उससे डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि लोगों को सावधान और जागरूक रहने की आवश्यकता है। ऐसे में तेज बुखार के साथ हड्डियों में दर्द हो और शरीर पर लाल दाने आ जाएं तो हर हाल में डाक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।
ये हैं खास लक्षण
डेंगू बुखार के संबन्ध में जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने दी बताया कि डेंगू के लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज़ बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, दस्त आदि।
डेंगू से बचाव के लिए करें ये उपाय
सीएमओ ने बताया कि दिन के समय मच्छरों को दूर रखने वाली क्रीम लगाएँ। पूरे शरीर को ढक कर रखने वाले कपड़े पहनें। घर के अंदर और आस-पास सफाई रखें। कूलर, गमले और टायर आदि में पानी न भरने दें और इन जगहों पर कैरोसीन तेल या मच्छर भगाने का पाउडर छिड़कर रखें। पानी की टंकियों को सही तरीके से ढंक कर रखें। खिड़की और दरवाजों में जाली लगवाएं।
सीएमओ ने बताया कि सम्भावित डेंगू प्रभावित ग्राम नदवासराय तथा भोपौरा में स्वास्थ्य विभाग की जनपद स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय रैपिड रिस्पांन्स टीम द्वारा 22 अक्टूबर से निरोधात्मक कार्यवाही के साथ जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, सोर्स रिडक्शन, ज्वर पीड़ित मरीजो के रक्त नमूनों की जाँच, क्लोरिन की गोली का वितरण, ब्लीचिंग पाउडर, नालियों में लार्वीसाडल छिड़काव किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम में नियमित साफ सफाई, नालियों की सफाई हेतु जिला पंचायत राज अधिकारी मऊ व समस्त खण्ड विकास अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। ब्लाक स्तरीय एवं जनपद स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा निरन्तर निगरानी की जा रही है। जनपद में किसी भी प्रकार का कोई ज्वर पीड़ित मरीज संज्ञान में आता है तो तत्काल सीएमओ आफिस वेक्टर बार्न को सूचित करें।
एपिडेमीमियोलॉजिस्ट रविशंकर ओझा ने बताया कि डेंगू का पता लगाने के लिए एलाइजा जांच बेहद जरूरी है जिससे डेंगू की पहचान होती है। एलाईजा जांच आज़मगढ़ के सदर अस्पताल एसआरएल लैब में निःशुल्क उपलब्ध है और इस जांच में मऊ के मरीजों को एक से दो दिन का समय लग जाता है लेकिन इस दौरान उनका इलाज जारी रहता है।
Published on:
30 Oct 2019 09:44 pm
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