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देवलास में रात्रि विश्राम किए थे भगवान राम, अयोध्या राज्य का है पूर्वी द्वार

किंवदंतियां हैं कि वनगमन के समय भगवान राम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ देवलास में रात्रि विश्राम किया था। रामचरित मानस में भी इसका उल्लेख इस चौपाई में भी किया गया है.. "बालक वृद्ध बिहार गृह, लगे लोग सब साथ, तमसा तीर निवास किए ,प्रथम दिवस रघुनाथ।"

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मऊ

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Abhishek Singh

Jan 13, 2024

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देवलास मंदिर

पूरा भारत इस समय राम मय हो रहा। पूजा और निमंत्रण के अक्षत चावल घर घर जा रहे। जो जैसे राम के प्रति श्रद्धा दिखा सकता है , दिखा रहा। मऊ जिले के लोग भी राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर काफी उत्साहित हैं। मऊ जिले के लोग वैसे भी अपने को अयोध्या से जुड़ा हुआ मानते हैं। मान्यता यह है कि मऊ जिले के देवलास अयोध्या राज्य का पूर्वी द्वार रहा है।

विक्रमादित्य ने मंदिर का जीर्णोद्धार किया
प्रचलित कहानियों के अनुसार गुरुदेव ऋषि वशिष्ठ के साथ तड़का वध के लिए बक्सर जाते समय भगवान राम यहां रुके थे और यहीं उन्होंने सूर्य के बालरूप के मंदिर की स्थापना की थी। अयोध्या के पूर्वी द्वार की मान्यता अंग्रेजों द्वारा प्रकाशित आजमगढ़ गजेटियर के पृष्ठ संख्या 156 पर भी दी हुई है। देवल ऋषि का यह आश्रम देवलास मऊ मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर मुहम्मदाबाद घोसी मार्ग पर स्थित है। मान्यता है कि देवल ऋषि ब्रह्मा के पुत्र और दक्ष प्रजापति के पुत्र थे। कालांतर में विक्रमादित्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया था।


देवलास की खासियत यह है कि यहां हर जाति के लोगों का अलग अलग मंदिर है, तथा उसी जाति के पुजारी हैं। कार्तिक मास में छाड़ के समय यहां भव्य मेला लगता है जो लगभग 10 दिन तक चलता है। इस जगह पर एक ऐसा रहस्यमई कुआं है जो साल भर सूखा रहता परंतु कार्तिक पूर्णिमा के एक हफ्ते पहले इसमें अचानक से पानी ए जाता है। वहीं यहां के मुख्य मंदिर के चौखट के नीचे बहुत सारा खजाना दबे होने की बात की जाती है। कई बार खुदाई की कोशिश हुई परंतु असफलता हाथ लगी।