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यूपी के इस सीट से फागू चौहान के बेटे की चुनाव लड़ने की चर्चा तेज, विपक्षियों की चिंता बढ़ी

30 सितम्बर तक नामांकन की अंतिम तिथी होने के चलते दावेदारों की धङकने बढी    

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मऊ

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Sarweshwari Mishra

Sep 26, 2019

Ram Vilas Chauhan

Ram Vilas Chauhan

मऊ. यूपी के मऊ जिले के घोसी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक रहे फागू चौहान के बिहार प्रदेश का राज्यपाल बन जाने के बाद उनके द्वारा छोड़ी गई घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में उनके ही बेटे रामविलास चौहान के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई है। इस बात को मजबूती तब मिला जब बुधवार को राज्यपाल फागू चौहान के बेटे ने चार सेटों में नामांकन पर्चा खरीदा।

बता दें कि पूर्व मंत्री फागू चौहान 2017 में जनपद के घोसी विधानसभा से विधायक चुने गए, जिन्हें गत दिनों बिहार प्रदेश का राज्यपाल बना दिया गया। जिसके बाद घोसी विधानसभा सीट रिक्त हो गई। हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा उप चुनाव की घोषणा की गई जिसमें घोसी विधानसभा में आगामी 21 अक्टूबर को मतदान किए जाएंगे। जिसके लिए मऊ जनपद कलेक्ट्रेट से नामांकन पर्चा बिकने का कार्य शुरू हुआ। बुधवार को बिहार राज्यपाल फागू चौहान के बेटे रामविलास चौहान ने 4 सेटों में पर्चा खरीदकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का दौर शुरू करा दिया।

अभी फिलहाल उक्त सीट से प्रमुख राजनीतिक दलों में कांग्रेस व बसपा ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित किए जबकि भाजपा व सपा से कोई प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में रामविलास चौहान द्वारा पर्चा खरीद को लोग विधानसभा चुनाव की तैयारी की दृष्टि से देख रहे हैं व राजनीतिक हलकों में एक चर्चा से दौड़ पड़ी है। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के पुत्र रामविलास चौहान निवासी शेखपुर बद्दोपुर जिला आजमगढ़ ने चार सेट में अपना फार्म खरीद लिया है। इनके फार्म खरीदे जाने के बाद यह कयास लगाए जाने लगा है कि कहीं भारतीय जनता पार्टी फागू चौहान के बेटे रामविलास चौहान को अपना उम्मीदवार तो नहीं घोषित कर देगी। इसको लेकर जनता समेत राजनीतिक दलों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा उम्मीदवार के रूप में राज्यपाल के पुत्र ही अपने पिता की सीट पर उपचुनाव में भाग लेंगे। घोसी विधानसभा सीट पर बिहार के राज्यपाल फागू चौहान का चार दशकों की राजनीतिक भूमि रही है, जहां प्रत्येक घर से उनका नाता है। ऐसे में उनकी राजनीतिक विरासत संभालने का मौका पुत्र को मिला तो पीछे नहीं रहेंगे।

BY- Ajay Kumar Singh