उत्तर प्रदेश की मात्र एक विधानसभा सीट पर इन दोनों उप चुनाव हो रहा है। घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले इस उपचुनाव में नेता अपने-अपने पक्ष में मतदान करने के लिए सरकार की योजनाओं को जनता के बीच मे बता कर मतदान करने की अपील कर रहे है। जिसमे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घोसी पहुँचकर चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया और मऊ की जनता को 2005 के मऊ दंगे की याद दिलाया कि किस तरह 2005 के दंगे में माफिया असलहा लहरा कर चलते थे और सपा सरकार ने कोई कदम नही उठाया तो उसे समय मैं गोरखपुर से चलकर मऊ के लोगों की मदद के लि
UP Politics: उत्तर प्रदेश की मात्र एक विधानसभा सीट पर इन दिनों उप चुनाव हो रहा है। घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले इस उपचुनाव में नेता अपने-अपने पक्ष में मतदान करने के लिए सरकार की योजनाओं को जनता के बीच मे बता कर मतदान करने की अपील कर रहे हैं । इस चुनावी जंग में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोसी पहुँचकर चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया और मऊ की जनता को 2005 के मऊ दंगे की याद दिलाई कि किस तरह 2005 के दंगे में माफिया असलहा लहरा कर चलते थे। तत्कालीन सपा सरकार ने जब कोई कदम नही उठाया तो उस समय मैं गोरखपुर से चलकर मऊ के लोगों की मदद के लिए आया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हमारी सरकार है और असलहा लहराने वाले माफिया अब व्हीलचेयर पर आ गए हैं।
2024 के लोकसभा इलेक्शन से जोड़कर देखा जा रहा घोसी का उपचुनाव
घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में सपा और बीजेपी के बीच में कड़ी टक्कर हो रही है। एक तरफ सत्ता दल है तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी। देखना यह है कि यह विधानसभा चुनाव कहां तक निर्णायक होता है क्योंकि चुनावी प्रचार में लगे हुए नेता घोसी विधानसभा को आने वाले 2024 के लोकसभा इलेक्शन से जोड़कर देख रहे हैं। इस चुनाव में सपा और भाजपा के नेता जुबानी जंग में आमने-सामने है ।5 तारीख को मतदान की तारीख नियत है। मतदान की तारीख से 2 दिन पहले योगी आदित्यनाथ का दौरा बीजेपी की जीत की तरफ इशारा करता है । इस चुनावी जनसभा में सपा और कांग्रेस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निशाना साधा तो बसपा को ले कर कुछ नरम दिखे। उन्होंने अपने चुनावी संबोधन में बसपा का एक बार भी जिक्र नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी का एक बार भी जिक्र नहीं करना इस बात की तरफ इशारा करता है कि दलित वोटर्स क्या इस बार बीजेपी को वोट करने वाला है? सवाल घोसी की जनता के लिए यही है कि वह सपा की तरफ जा है या भारतीय जनता पार्टी की तरफ ।वही इस पूरे विधानसभा क्षेत्र में इस बार वोटो का ध्रुवीकरण इस कदर हुआ है कि सपा और बसपा के बड़े-बड़े दिग्गज नेता दलित वोटर्स को अपनी तरफ लुभाने के लिए लगे हुए हैं ।
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से जहां सभी जातियों का नेतृत्व करने वाले नेताओं को चुनावी मैदान में उतार दिया गया है वहीं भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान अपने समाज को लेकर जीत दर्ज करवाने के लिए जुटे हुए हैं। वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ से यादव परिवार चुनावी मैदान में कमर कस करके खड़ा हुआ है। इस बार बहुजन समाज पार्टी की तरफ से कोई प्रत्याशी नहीं होने की वजह से दलितों के वोटों को सपा और बसपा अपने-अपने खेमे में करने के जुगत में लगे हुए हैं ।हालांकि घोसी विधानसभा में होने वाला उपचुनाव में कुल 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है लेकिन सपा और भाजपा के बीच जहां कड़ी चुनावी टक्कर है तो वहीं मैदान में और नौ प्रत्याशी मैदान में है परंतु कोई उनके बारे में किसी भी तरह की बात करते नहीं दिखाई पड़ रहा है। वह प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में चुनाव प्रचार करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं।
घोसी विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए आने वाले दिग्गज नेता इस चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं क्योंकि उनका यह मानना है कि आने वाले 2024 में लोकसभा चुनाव का आगाज घोसी विधानसभा के चुनाव से ही तय होने वाला है। हालांकि नेताओं के इस तरीके के बयान बाजी से यह साफ जाहिर होता है कि आने वाला वर्ष चुनावी वर्ष होगा और उसमें घोसी विधानसभा काफी अहम रोल होगा फिलहाल 8 सितंबर को चुनावी नतीजे के बाद ही यह तय हो पाएगा की बदलाव की बयार किस तरफ है।