
Ramdev Baba: मऊ जिले के सिकटिया ओवरब्रिज के पास स्थित एक निजी विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में योग गुरु बाबा रामदेव और भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त आईएएस) एमपी सिंह ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का दावा किया। दोनों ने आम जनों से संवाद कर नई शिक्षा पद्धति के उद्देश्यों और भविष्य की रूपरेखा को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे अध्यक्ष एमपी सिंह के साथ योग गुरु बाबा रामदेव ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और बोर्ड के माध्यम से तैयार हो रहे छात्रों के भविष्य का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा प्रणाली छात्रों को न केवल ज्ञानवान बनाएगी, बल्कि उन्हें चरित्रवान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक भी बनाएगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड की शिक्षा पद्धति से पढ़ने वाले छात्रों को कोचिंग संस्थानों की “लूट” का शिकार नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रणाली में जाति, वर्ग और समुदाय से ऊपर उठकर हर बच्चे को “क्रिएटर” और दूरदर्शी नागरिक बनाने पर बल दिया जाएगा।
उन्होंने पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश को राजनीतिक आजादी तो मिल गई, लेकिन शिक्षा, चिकित्सा, अर्थव्यवस्था और विचारधारा के क्षेत्र में अब भी “गुलामी” बनी हुई है। भारतीय शिक्षा बोर्ड इन सभी बंधनों से मुक्ति दिलाने का प्रयास कर रहा है।
बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि इस नई शिक्षा व्यवस्था से उन तत्वों को खतरा है जो शिक्षा के नाम पर लूट-खसोट कर रहे हैं या समाज में गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में करीब एक लाख छात्र भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़ चुके हैं और अगले 10 वर्षों में इस संख्या को बढ़ाकर 5 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और शिक्षा के इस नए मॉडल को लेकर उत्सुकता दिखाई।
Published on:
22 Mar 2026 10:20 pm
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