ऐसी मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का दर्शन करता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। सावन में तो शिवभक्तो का मेला लगा रहता है। कांवड़िए गाजीपुर जिले से गंगा जल लाकर चढ़ाते है। मन्दिर के गर्भगृह, गुबन्द, दिवारों और प्रवेश द्वारा पर निर्माण के लिखे शक संवत को कोई पड़ नहीं पाता। पर मन्दिर के बाहर के गेट पर निर्माण का शक सवंत लिखा है जो लोग जानते हैं। पिथौरागढ के महाराजा ने मन्दिर का निर्माण करवाया लेकिन उन्होंने अपना गुप्त नाम रखा। इस स्थान पर सरकारी और स्थानीय अभिलेखों में पिथौरागढ़ के महाराजा द्वारा निर्मित लिखा हुआ मिलता है।