
अखिलेश बनेंगे इंडिया गठबंधन का चेहरा? Source- Patrika
UP Politics: यूपी की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल मची हुई है। अनुमान हैं कि राज्य में अप्रैल या मई 2026 में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इन सीटों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ये चुनाव सपा और भाजपा दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके नतीजे 2027 की तैयारी और रणनीति पर असर डालेंगे।
तीन सीटें हैं - मऊ जिले की घोसी विधानसभा, बरेली की फरीदपुर और सोनभद्र की दुद्धी। इन सीटों पर विधायकों के निधन के कारण उपचुनाव जरूरी हो गए हैं। घोसी और दुद्धी पर यह दूसरी बार एक ही कार्यकाल में उपचुनाव हो रहा है। इन चुनावों में सपा और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपचुनाव 2027 के बड़े चुनाव का एक तरह से सेमीफाइनल होंगे।
घोसी विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा ध्यान है। यहां पूर्व विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद सीट खाली हुई। समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे सुजीत सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। सुधाकर सिंह घोसी से पहले भी विधायक रह चुके थे और यह सीट सपा के लिए काफी मजबूत मानी जाती है। सुजीत सिंह को टिकट देकर सपा ने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं घोसी उपचुनाव में एक बड़ा ऐलान हुआ है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह सपा के उम्मीदवार सुजीत सिंह को पूरा समर्थन देगी। कांग्रेस खुद मैदान में नहीं उतरेगी, बल्कि सपा के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती देगी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2027 में कांग्रेस यूपी में अकेले तीसरी पार्टी की भूमिका में नहीं रहेगी, क्या पूरे इंडिया ब्लॉक के साथ चुनाव लड़ेगी।
इस मुद्दे पर हमने राजनीतिक विशेषज्ञ दिलीप तिवारी से बात की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने सपा को समर्थन इसलिए दिया, क्योंकि यूपी में अभी कांग्रेस अकेले मजबूत नहीं है। यहां सपा को दूसरी सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। कांग्रेस के लिए यूपी का मैदान अकेले भेदना बहुत मुश्किल है। तिवारी ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस के पास 100 से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन कई राज्यों में वह तीसरी या चौथी पार्टी के रूप में देखी जाती है। इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सपा की जरूरत पड़ेगी।
अगर कांग्रेस और सपा 2027 में साथ चुनाव लड़ते हैं, तो सीटों का बंटवारा बड़ा मुद्दा बनेगा। दिलीप तिवारी का मानना है कि सपा यूपी में बहुत मजबूत है। लोकसभा चुनाव में भी सपा ने अपनी ताकत दिखाई है। कांग्रेस भले ही 100 से ज्यादा सीटों की मांग करे, लेकिन सपा उसे 50 से ज्यादा सीटें देने की गलती नहीं करेगी। उन्होंने बिहार का उदाहरण दिया, जहां कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। उसके बाद सपा कांग्रेस को ज्यादा सीटें नहीं देगी। सपा जानती है कि यूपी में उसका बोलबाला है, इसलिए वह अपनी मजबूती बनाए रखना चाहेगी। वहीं लोकसभा चुनाव के बाद हमने देखा था कि दोनों के अखिलेश यादव ने कहा था कि वो यूपी में अकेले चुनाव लड़ेंगे, लेकिन कांग्रेस ने घोसी सीट पर समर्थन देकर यह साबित किया है कि यूपी में सपा ही कांग्रेस का बड़ा भाई है।
कई लोग पूछते हैं कि क्या कांग्रेस यूपी में महागठबंधन या इंडिया गठबंधन की चेहरा बनेगी? दिलीप तिवारी ने साफ कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। अगर गठबंधन चुनाव लड़ेगा, तो उसकी सबसे बड़ी पार्टी सपा ही रहेगी। अखिलेश यादव ही गठबंधन का चेहरा होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि अक्सर चुनावों में राहुल गांधी विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, जो हार का बड़ा मुद्दा बन जाता है, लेकिन अखिलेश यादव यूपी में ऐसी गलती नहीं करेंगे। वह लगातार जमीन पर सक्रिय रहते हैं और पार्टी को मजबूत करते हैं। इसलिए गठबंधन का नेतृत्व अखिलेश यादव के हाथ में ही रहेगा।
ये उपचुनाव सिर्फ तीन सीटों के नहीं हैं। ये भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई हैं। अगर सपा मजबूत प्रदर्शन करती है, तो 2027 में इंडिया गठबंधन की उम्मीदें बढ़ेगी। वहीं भाजपा इन चुनावों को गंभीरता से ले रही है। आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति और रोचक होने वाली है।
Published on:
14 Jan 2026 02:39 pm
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