
मेरठ। दीवानी न्यायालय परिसर में बाउंड्री वॉल बनाने के हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर मेरठ और जिला बार एसोसिएशन की संयुक्त आम सभा आयोजित की गई। इसमें प्रस्ताव पास किया गया कि 14 फरवरी को इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक होगी। तभी तक सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेंगे।
मेरठ में अदालतों की सुरक्षा को लेकर फिर से एक बार परेशानी खड़ी हो गई है। इस बारे में बार एसोसिएशन की आम सभा बुलाई गई। मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगे राम ने बताया कि बिजनौर अदालत में दो लोगों की हत्या के बाद अदालतों की सुरक्षा की मांग की गई थी। जिस पर अदालतों की सुरक्षा का खाका तैयार करते हुए हाईकोर्ट ने एक प्रस्ताव तैयार किया था। जो कि प्रदेश के सभी जिलों में भेजा गया था। अधिकांश जिलों में तो यह प्रस्ताव मान लिया गया। जबकि कुछ जिले जैसे मेरठ, लखनऊ और कानपुर में इस प्रस्ताव पर व्यवहारिक दिक्कतें आ रही हैं। इन तीनों जिलों में ही कलक्ट्रेट और कचहरी एक ही परिसर में हैं। मेरठ में कलक्ट्रेट और कचहरी दोनों एक ही जगह होने पर इन जगहों पर अदालतें भी है। कलक्ट्रेट में करीब तीन हजार वकील काम करते हैं। जबकि कचहरी में पांच हजार वकील हैं। अगर इन दोनों के बीच सुरक्षा को लेकर दीवार खड़ी की जाती है तो बड़ी परेशानी होगी।
वकीलों ने एक प्रस्ताव तैयार कर डीएम को भेजा है। जिसमें कचहरी और कलक्ट्रेट को अलग-अलग करने की बात कही गई है। वहीं इसके अलावा आगामी कुछ दिनों में केद्रीय संघर्ष समिति की बैठक 14 फरवरी को बुलाई गई है, जिसमें पश्चिम उप्र के सभी 22 जिलों के अधिवक्ता शामिल होंगे। उसमें वकीलों की समस्याओं से संबंधित एक प्रस्ताव पास कर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। उनसे मांग की जाएगी कि एक हाई कमेटी गठित कर मेरठ और यहां के आसपास के जिलों में भेजी जाए जो यहां की समस्याओं का अवलोकन कर अपनी रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश महोदय के सामने रखेगी। 14 फरवरी तक अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
Published on:
12 Feb 2020 02:42 pm
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