
अभी 15 दिन बाद आएगी ठंड, इसके पीछे हैं ये खास वजहें
मेरठ। धार्मिक शास्त्रों के वर्ष 2018 में अधिमास था। जिसमें हिन्दू पंचांग और हिन्दू माह कलेंडर के अनुसार वर्ष में एक माह अधिक होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अगर इस वर्ष अधिमास नहीं होता तो यह माह नवंबर होता और दीपावली और छठ पर्व भी लोग मना चुके होते। अधिमास के कारण दोनों पर्व बीते अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष देरी से आ रहे हैं। इसी कारण सर्दी आने में भी देर हो रही है और मौसम भी पल-पल बदल रहा है। इस अधिमास के कारण अभी 15 दिन और ठंड का इंतजार करना होगा।
अधिमास और मौसम पर पड़ रहा असर
अपने देश में दिन महीने और वर्ष की गणना के दो तरीके प्रयोग किए जाते हैं। पहला तरीका चंद्रमा और दूसरा है सूर्य। जबकि विश्व में सूर्य के अनुसार दिन और मास की गणना की जाती है। ज्योतिषाचार्य कैलाशनाथ द्विवेदी के अनुसार चन्द्रमा को महीने का अविष्कारक कहा गया है। वर्ष ऋतु पर अयन का ज्ञान सूर्य से और तिथि मास का ज्ञान चंद्रमा से होता है। मकर, बिशु संक्रांति, विश्वकर्मा पूजा सूर्य मास संक्रांति के अनुसार होती है। जबकि त्योहार, शादी विवाह खेती आदि चन्द्र अमावस्या-पूर्णिमा मास के अनुसार होता है।
भूगोलविद् डा. कंचन सिंह के अनुसार एक चन्द्र मास में 354 दिन और एक सौर मास 365 दिन छह घंटा का होता है। इस तरह प्रति साल सौर वर्ष से चन्द्र वर्ष ग्यारह दिन काम होने लगता है। सौर वर्ष ऋतु के चक्र पर आधारित है। प्रत्येक तीन वर्षों में 11 दिन प्रति साल बढ़ता है। जो तीन साल बाद 33 दिन हो जाता है। यह बढ़े हुए दिन सौर और चन्द्र मास को बराबर करते हैं। पर्व और त्योहार के साथ सामंजस्य के लिए लगभग 32 या 33 महीने पर तीसरे साल में मध्य मान से अधिक मास मलमास या खरमास के नाम से जाना जाता है। इससे पहले मलमास वर्ष 2015 में लगा था उसी तरह से तीन साल बाद यानी 2018 में इस बार मलमास पड़ा है। जिस कारण ठंड आने में देरी हो रही है। मेष आदि राशियों पर सूर्य के रहने पर चंद्रमा जिस-जिस मास को पूरा करता है, उस चन्द्र मास का नाम उसी सौर मास के अनुरूप होता है। एक राशि मे सूर्य के रहने पर चन्द्र के द्वारा दो मासों की पूर्ति किये जाने पर अंतिम मास अधिक मास होता है।
उत्तर पश्चिम मानसून पकड़ रहा जोर
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब लगभग जा चुका है और उत्तर पश्चिम मानसून जोर पकड़ रहा है। जिस कारण वातावरण और मौसम में खासे बदलाव देखने को मिल रहे है। इस समय वर्षा ऋतु की समाप्ति और शरद ऋतु का प्रारंभ काल है। वर्षा में संचित पित्त शरद ऋतु में सूर्य की तीखी किरणों से पिघलने लगता है और इस कारण प्रकुपित हो जाता है। इसी कारण मौसम में दिन में पारा बढ़ रहा है और रात में जिस प्रकार की ठंड पड़नी चाहिए वैसी नहीं पड़ रही है।
Published on:
20 Oct 2018 10:51 am
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