22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Basant Pancham: 750 साल से मनाई जा रही औलिया की दरगाह में बसंत पंचम, जानिये खासियत

Highlights: -पीली पोशाक पहनकर और पीले फूल के साथ पहुंचेगे श्रद्धालुगण -दो महीने पहले ही शुरू हो जाती है औलिया की दरगाह पर तैयारी -मेरठ में भेजे गए कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण

2 min read
Google source verification

मेरठ

image

Rahul Chauhan

Dec 12, 2020

1203.jpg

पत्रिका न्यूूज नेटवर्क

मेरठ। कोविड-19 के प्रोटोकाल के तहत दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया में इस बार भी बसंत पंचमी मनाई जाएगी। इसकी तैयारियों की शुरूआत हो चुकी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों को अभी से दरगाह की ओर से तैयारियों के निमंत्रण भेजे जाने लगे हैं। मेरठ कैंट में रहने वाले सज्जाद खान को भी दरगाह के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्त हुआ है। सज्जाद खान के मुताबिक वे प्रतिवर्ष दरगाह में बसंत पंचमी के मौके पर मनाए जाने वाले कार्यक्रम में शामिल होने जाते हैं। इस बार भी उनको निमंत्रण प्राप्त हुआ है। लेकिन इस बार कार्यक्रम अन्य वर्ष की अपेक्षा थोड़ा सावधानी से मनाया जाएगा।

यह भी पढ़ें : पुलिस पर हमले के आरोपी भाजपा नेताओं को राहत, कोर्ट ने यूपी सरकार का आवेदन स्वीकार किया

उन्होंने बताया कि करीब 700 साल से लगातार हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर सदियों से बसंत उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि बसंतोत्सव कों दरगाह में देखने के लिए तमाम अलग-अलग जगहों से पीले पोशाक में लोग पहुंचेंगे। इस दौरान औलिया की दरगाह पर पूछले फूल ओर पीली चादर चढाई जाएगी। लोग भी दरगाह में बसंत के रंगों को देखकर काफी खुश नजर आते हैं लोगों ने खुबसूरत कव्वाली के साथ अपनी शाम दरगाह में गुजारते हैं। इस रंगारंग त्योहार की सभी मजहबों के लोगं चिश्ती शाह की याद में पूरे मेल-मिलाप और उत्साह से मनाते हैं।

यह भी पढ़ें: Farmer Protest: उग्र हुआ किसानों का प्रदर्शन, सभी Toll Plaza पर कब्जा कर किया Free

सज्जाद खान ने बताया कि माना जाता है कि निजामुद्दीन औलिया अपने भांजे की मौत हो जाने के बाद बेहद गमगीन थे। बसंत के मौके पर हजरत अमीर खुसरों ने कुछ औरतों को गाना गाते हुए और पीले फूल के साथ पीली पोशाकों में जाते देखा तो खुसरों ने भी ऐसा रूप धारण कर हजरत निजामुददीन औलिया के सामने गाना गाया। जिससे औलिया के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। जिसके बाद से 750 साल से लगातार हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बसंत का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सांप्रदायिक सौहार्ड की निशानी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव की तैयारियां दो महीने पहले से शुरू हो जाती है।