
पत्रिका न्यूूज नेटवर्क
मेरठ। कोविड-19 के प्रोटोकाल के तहत दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया में इस बार भी बसंत पंचमी मनाई जाएगी। इसकी तैयारियों की शुरूआत हो चुकी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों को अभी से दरगाह की ओर से तैयारियों के निमंत्रण भेजे जाने लगे हैं। मेरठ कैंट में रहने वाले सज्जाद खान को भी दरगाह के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्त हुआ है। सज्जाद खान के मुताबिक वे प्रतिवर्ष दरगाह में बसंत पंचमी के मौके पर मनाए जाने वाले कार्यक्रम में शामिल होने जाते हैं। इस बार भी उनको निमंत्रण प्राप्त हुआ है। लेकिन इस बार कार्यक्रम अन्य वर्ष की अपेक्षा थोड़ा सावधानी से मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि करीब 700 साल से लगातार हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर सदियों से बसंत उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि बसंतोत्सव कों दरगाह में देखने के लिए तमाम अलग-अलग जगहों से पीले पोशाक में लोग पहुंचेंगे। इस दौरान औलिया की दरगाह पर पूछले फूल ओर पीली चादर चढाई जाएगी। लोग भी दरगाह में बसंत के रंगों को देखकर काफी खुश नजर आते हैं लोगों ने खुबसूरत कव्वाली के साथ अपनी शाम दरगाह में गुजारते हैं। इस रंगारंग त्योहार की सभी मजहबों के लोगं चिश्ती शाह की याद में पूरे मेल-मिलाप और उत्साह से मनाते हैं।
सज्जाद खान ने बताया कि माना जाता है कि निजामुद्दीन औलिया अपने भांजे की मौत हो जाने के बाद बेहद गमगीन थे। बसंत के मौके पर हजरत अमीर खुसरों ने कुछ औरतों को गाना गाते हुए और पीले फूल के साथ पीली पोशाकों में जाते देखा तो खुसरों ने भी ऐसा रूप धारण कर हजरत निजामुददीन औलिया के सामने गाना गाया। जिससे औलिया के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। जिसके बाद से 750 साल से लगातार हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बसंत का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सांप्रदायिक सौहार्ड की निशानी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव की तैयारियां दो महीने पहले से शुरू हो जाती है।
Published on:
12 Dec 2020 05:36 pm
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