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जानिए कौन थीं बेगम कुदेसिया जो बनी यूपी की पहली महिला विधायक और एशियाई महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष

Meerut News: एशियाई महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष के पद का जिनके पास जिम्मा रहा। यूपी की इस मुस्लिम महिला को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी मिली। जो 1937 में पहली बार यूपी से विधायक बनीं थीं। ऐसी मुस्लिम महिला के बारे में जानकार हैरान हो जाएंगे।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Aug 01, 2023

कौन थी यूपी की पहली मुस्लिम महिला जो बनीं एशियाई महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष, जो बनीं देश की पहली महिला विधायक

कौन थी यूपी की पहली मुस्लिम महिला जो बनीं एशियाई महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष

Meerut News: यूपी की पहली मुस्लिम महिला जो विधायक रहीं और इसी के साथ भारतीय महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष भी रहीं। वो थी बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल। बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल भारत की संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला थीं। जिनको भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए जिम्मेदार दी गई थीं। उन्होंने 20 सालों तक भारतीय महिला हॉकी महासंघ के अध्यक्ष का पद की जिम्मेदारी संभाली और एशियाई महिला हॉकी महासंघ की अध्यक्ष रहीं। बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल का जन्म 2 अप्रैल 1909 को ब्रिटिश भारत के लाहौर में में हुआ था। वह सर जुल्फिकार अली खान की बेटी थी। जो पंजाब की एक रियासत मलेरकोटला के शासक परिवार से थे और महमूदा सुल्ताना जो लोहारू के नवाब, नवाब अलाउद्दीन अहमद खान की बेटी थी।

उन्होंने 1929 में अवध(उत्तर प्रदेश) के हरदोई जिले में संडीला के तालुकदार (जमींदार) नवाब एजाज रसूल से शादी हुई। उनकी शादी के दो साल बाद, उनके पिता सर जुल्फिकार अली खान की 1931 में मृत्यु हो गई। उसके बाद बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल अपने पति के साथ मुस्लिम लीग में शामिल हो गईं। भारत सरकार अधिनियम 1935 के अधिनियमन के बाद चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। 1937 के चुनावों में, वह उन कुछ महिला उम्मीदवारों में से एक थीं। जिन्होंने एक गैर-आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और यूपी विधान सभा के लिए चुनीं गईं।

वह 1952 तक कार्यालय में रहीं और 1937 से 1940 तक परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 1950 से 1952-54 तक परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। बेगम क़ुदसिया ऐज़ाज़ रसूल भारत की पहली महिला और इस विशेष स्थान तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली मुस्लिम महिला बनीं। जमींदार परिवार से होने के बावजूद बेगम रसूल भी जमींदारी उन्मूलन का पुरजोर समर्थन करती थी। वह 1946 में भारत की संविधान सभा के लिए भी चुनी गईं और विधानसभा में एकमात्र मुस्लिम महिला थीं। जबकि 1950 में, जब भारत में मुस्लिम लीग भंग हो गई, वह कांग्रेस में शामिल हो गईं और 1952-54 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं और 1969 से 1989 तक उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने 1969 और 1971 के बीच में एक समाज कल्याण और अल्पसंख्यक सदस्य के रूप, भी कार्य किया।2000 में, बेगम रसूल को सामाजिक कार्यों में उनके योगदान के लिए तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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1953 में, जापान में प्रधानमंत्री के सद्भावना प्रतिनिधिमंडल और 1955 में, तुर्की में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य बनीं। लगभग 20 वर्षों तक, बेगम रसूल ने भारतीय महिला हॉकी महासंघ के अध्यक्ष का पद संभाला और एशियाई महिला हॉकी फेडरेशन संघ की अध्यक्ष भी रहीं। यहां तक कि भारतीय महिला हॉकी कप का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है। बेगम रसूल ने 'थ्री वीक्स इन जापान' किताब भी लिखी और उनकी आत्मकथा का नाम 'फ्रॉम परदाह टू पार्लियामेंट: ए मुस्लिम वुमन इन इंडियन पॉलिटिक्स' है। 1 अगस्त 2001 को 92 वर्ष की आयु में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में उनका निधन हो गया।