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जंगल के अंदर चल रहा था फर्जी डिग्रियों का बड़ा कारोबार, पहुंची पुलिस तो रह गई हैरान

जंगल के अंदर एक कॉलेज में फर्जी डिग्रियों का धड़ल्ले से कारोबार चल रहा था।

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Big business of fake degrees in forest in meerut

मेरठ। सूबे की योगी सरकार भले ही क्वालिटी एजुकेशन पर जोर दे रही है। लेकिन, इससे अलग राज्य में फर्जी डिग्रियों का कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। आलम यह है कि चंद पैसे लेकर एक से बढ़कर एक डिग्रियां मिनटों में मिल जा रही है। ताजा मामला है मेरठ के किठौर का, जहां के भटीपुरा जंगल स्थित एक फर्जी कॉलेज में ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की डिग्रियां फर्जी तरीके बेची जा रही थी।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

जानकारी के मुताबिक, भटीपुरा के जंगल में स्थित एक कॉलेज जो आमतौर पर काफी सूनसान रहता था। इधर, कई महीने से गुलजार दिखाई दे रहा था। जंगल की पगडंडियों पर दिन-रात लग्जरी गाडियों का आना-जाना लगा रहता था। ग्रामीणों को जब जंगल स्थित स्कूल में संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी हुई, तो उन्होंने किठौर थाना को इसके बारे में जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद किठौर एसओ राजेन्द्र त्यागी ने अपने दल-बल सहित स्कूल में छापा मारा तो वहां का नजारा देख सब हैरान रह गए। उन्होंने बतया कि कॉलेज के कमरों में कई विश्वविद्यालयों की कोरी डिग्रियां, मार्कशीट के अलावा कई नामी बैंकों की ब्लैंक पासबुक का जखीरा पड़ा हुआ था। वहीं, कॉलेज के दूसरे कमरे में कम्प्यूटर स्कैनर और प्रिंटर लगे हुए थे। पुलिस ने सभी चीजों को जब्त कर जानकारी अपने आलाधिकारियों को फिलहाल दे दी है।

कई कॉलेजों की मिलती थी डिग्रियां

एसओ किठौर राजेन्द्र त्यागी ने बताया कि जंगल में एएनजी कॉलेज में फर्जी डिग्रियां पैसे लेकर दी जा रही थी। इसके संचालक नावेद अली पुत्र ताहिर नि0 थाना जानी है। उन्होंने बताया कि कमरों में कम्प्यूटर पर सिंघानिया यूनिवर्सिटी, मोनार्ड यूनिवर्सिटी, जेआरएम विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कई अन्य डीम्ड यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट बनाई जा रही थी। एसओ का कहना था कि कम्प्यूटर पर काम कर रहे लोग मौके पर पुलिस को देख खिड़की खोलकर जंगल में भाग गए। छापेमारी के दौरान कमरे से काफी संख्या में ग्राम प्रधानों, बेसिक शिक्षा से संबंधित, सरकारी आधिकारिक कागज, मार्कशीट बनाने के पेपर, प्रिंटर और सॉफ्टेवयर के साथ-साथ सीडी बरामद हुई है।

ऑनडिमांड तैयार होती थी पीएचडी की मार्कशीट और डिग्री

मौके से पकडे गए ऑपरेटर ने बताया कि पीएचडी की मार्कशीट और डिग्रियां आन डिमांड तैयार की जाती थी। पीएचडी की मार्कशीट और डिग्री 50 हजार रुपये में और ग्रेजुएशन की मार्कशीट बीस हजार रूपये में मिल रही थी। इसके अलावा एएनजी ग्रुप के नाम से सोसाइटी, मदरसा, पब्लिक स्कूल और आईटीआई कॉलेज की मुहर भी मिली है। इस बारे में जब स्कूल संचालक नावेद चौहान से बात हुई तो उसने बताया कि वह अभी बाहर है। उसके पास सभी के दस्तावेज मौजूद हैं। किसी को संदेह हो तो वह स्वयं सभी सबूत प्रस्तुत कर सकता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारी करेंगे मामले की जांच

वहीं, फर्जी डिग्री, मार्कशीट बरामदगी के बारे में जब एसपी देहात राजेश कुमार से बात की गई तो उनका कहना था कि मामले की जांच शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कराई जाएगी।

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