
मेरठ। नगर निगम चुनाव में मेयर पद गवाने वाली भाजपा को बसपा ने नगर निगम उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में फिर से धूल चटा दी। पांच दिन पहले हुए हंगामे के बाद बुधवार को नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के चुनाव में बसपा गठबंधन के इकरामुद्दीन सात वोट पाकर कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष चुने गए हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रत्याशी ललित नागदेव को पांच वोट मिले। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष को नगर आयुक्त ने हाथों हाथ प्रमाण पत्र सौंप दिया।
नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पिछले कई दिन से हंगामे की स्थिति बनी थी। 15 फरवरी को यह चुनाव होना था, लेकिन भाजपा पार्षदों की आपत्ति पर एकाएक नगर आयुक्त द्वारा चुनाव को टाल दिया गया था। जिसके विरोध में महापौर और बसपा गठबंधन के पार्षदों ने कई दिन तक नगर निगम में हंगामा किया और धरना दिया था।
पांच दिन के विवाद के बाद 21 फरवरी को फिर से चुनाव कार्यक्रम तय किया गया था। बुधवार 21 फरवरी को टाउन हॉल तिलक सभागार में चुनाव प्रक्रिया आयोजित की गई। चुनाव अधिकारी नगर आयुक्त मनोज चौहान के दिशा निर्देशन में उप निर्वाचन अधिकारी अपर नगर आयुक्त अली हसन कर्नी और लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी की देखरेख में चुनाव हुआ।
सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए इकराम सुबह 11 बजे नामांकन पत्र देने का काम शुरू हुआ। बसपा गठबंधन से पांच ने तथा भाजपा के दो पार्षदों ने नामांकन पत्र लिया। यह बात अलग है कि नामांकन पत्र भरकर दोनों ओर से केवल दो उम्मीदवारों ने ही जमा कराएं। सपा छोड़कर आज ही बसपा में शामिल हुए इकरामुद्दीन को बसपा ने चुनाव लड़ाया, वहीं भाजपा की ओर से ललित नागदेव प्रत्याशी बने।
दोपहर 12.40 से मतदान शुरू हुआ तथा एक बजे तक सभी 12 सदस्यों ने मत डाले। 1 बजे मतगणना हुई जिसमें सात वोट मिलने पर बसपा के उम्मीदवार इकरामुद्दीन को विजयी घोषित किया गया। नगर आयुक्त मनोज चौहान ने वहीं पर उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंपा।
उपाध्यक्ष बनने को छोड़ दी सपा
सपा से पार्षद पद का चुनाव जीतने वाले इकरामुद्दीन चुनाव के बाद बसपा गठबंधन के साथ थे। बसपा गठबंधन में ही उन्होंने कार्यकारिणी के सदस्य का चुनाव लड़ा और जीते। आज बसपा ने उन्हें ही कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ाया। इससे पहले सुबह इकरामुद्दीन ने सपा को छोड़कर बसपा में शामिल होने की घोषणा की। यह जानकारी उन्होंने चुनाव जीतने के बाद टाउन हॉल में सभी पत्रकारों को दी।
पांच सदस्यों के दम पर जीतना चाहती थी भाजपा
बसपा गठबंधन के सात, एक सपा व एक अन्य तथा भाजपा के पांच सदस्य थे। कम सदस्य होने के बावजूद भाजपा इस चुनाव को जीतना चाहती थी। पहले यह चुनाव 15 फरवरी को होना था, लेकिन तिथि की त्रुटि को देखते हुए नगर आयुक्त ने चुनाव रद्द कर दिया था।
नगर आयुक्त के चुनाव रद्द करने के बाद बसपा गठबंधन के पार्षद तीन दिन तक धरने पर बैठे थे। सोमवार को नगर आयुक्त ने चुनाव कराने की सहमति दे दी थी। इसके बाद महापौर सुनीता वर्मा ने 21 फरवरी को चुनाव कराने की घोषणा की थी।
Published on:
21 Feb 2018 08:38 pm
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