
भाजपा के गढ़ में मायावती ने खेला है बड़ा दांव, मेयर के चुनाव में भी दी थी भाजपा को कड़ी मात
मेरठ। मेरठ जनपद की सात सीटों पर भाजपा के छह विधायक, भाजपा का मेयर आैर जिला पंचायत अध्यक्ष अध्यक्ष भी भाजपा का, इतने मजबूत भाजपा के किले में पिछले नगर निगम चुनाव में मेरठ के मेयर के पद पर मायावती ने एेसा बड़ा दांव खेला था कि सब चौंक गए थे। दरअसल, भाजपा की इतनी मजबूत किलेबंदी के बावजूद बसपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा ने मेयर पद पर चुनाव जीता था आैर भाजपा को हैरत में डाला था। इस जीत में बसपा ने दलित-मुस्लिम समीकरण पर दांव खेला था, जो बेहद सफल रहा था। मेरठ भाजपा का गढ़ माना जाता है, एेसे में बसपा ने तुरुप का पत्ता चलकर भाजपा हार्इकमान को सकते में डाल दिया था आैर पूरी यूपी में सोचने को मजबूर कर दिया था। माना जाता है कि सपा-बसपा गठबंधन की नींव भी मेरठ नगर निगम मेयर चुनाव का परिणाम देखकर रखी गर्इ। यही वजह है कि लोक सभा चुनाव में पिछले दो बार से सांसद राजेंद्र अग्रवाल आैर पार्टी को इस बार मायावती के इसी दांव ने परेशानी में डाल रखा है।
याकूब कुरैशी ने बढ़ाया रोमांच
मेरठ-हापुड़ लोक सभा सीट पर गठबंधन के याकूब कुरैशी आैर भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल मैदान में हैं। कांग्रेस ने हरेंद्र अग्रवाल को चुनाव में उतारा है, एेसे में यहां मुकाबला सीधे-सीधे-सीधे गठबंधन आैर भाजपा के बीच तय माना जा रहा है। इसकी वजह ये है कि दलित-मुस्लिम समीकरण यहां काफी मजबूत माना जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी से हिन्दू वोट को नुकसान पहुंचने की संभावना प्रबल हुर्इ हैं। गठबंधन का मुख्य आधार नगर निगम मेयर चुनाव के दलित-मुस्लिम समीकरण को मजबूत करना है। यही वजह है कि मायावती की नजर बसपा की मेयर सुनीता वर्मा के मेयर बनने के बाद से मेरठ-हापुड़ लोक सभा सीट पर जम गर्इ थी आैर गठबंधन बनने के बाद अपना प्रत्याशी याकूब कुरैशी को यहां से उतारने में देरी नहीं की आैर अपने जन्मदिन पर ही पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी को यहां से प्रत्याशी बनाने के संकेत दे दिए थे। बसपा नेता सुनील वाधवा का कहना है कि लोक सभा चुनाव में मेरठ-हापुड़ सीट पर पार्टी की जीत निश्चित है, क्योंकि दलित-मुस्लिम समीकरण नगर निगम के मेयर चुनाव की तरह फिर जीत का आधार तय करेगा।
Published on:
26 Mar 2019 10:58 am
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