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रिटायर्ड सीओ से लाखों की ठगी करने के बाद आरोपियों के ‘सुसाइड’ में दब गया था मामला, तीन साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा…

Highlights तीन साल पहले सीमेंट के लिए दी थी 10 लाख की रकम पुलिस से तीन आरोपियों के जिंदा होने की शिकायत लोगों ने मिले फर्जी सुसाइड नोट को फर्जी बताया

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मेरठ। रिटायर्ड सीओ से दस लाख रुपये की ठगी कर ली गई। मामला दबाने के लिए आरोपियों ने गंगनहर में कूदकर आत्महत्या करने की अफवाह फैला दी। तीन साल बाद तीन आरोपियों के जिंदा होने की सूचना पर पुलिस अफसरों से इसकी शिकायत की गई। इस मामले में अब मामला दर्ज किया गया है।

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हाथरस के नंगला उम्मेद निवासी रिटायर्ड सीओ जगदीश सिंह का कहना है कि 2016 में मेरठ में तैनाती के दौरान उनकी मुलाकात सीमेंट कंपनी चलाने वाले न्यू प्रभात नगर निवासी चतरसेन, पप्पू उर्फ जितेंद्र और रविंद्र से हुई थी। वह 15 मई 2016 को वे मकान निर्माण के लिए अपने दोस्त मंगलपांडे नगर निवासी देव गर्ग के घर गए थे। वहीं ये तीनों भाई पहुंचे और कहा कि अगर वह उन्हें दस लाख रुपये देते हैं तो वह उन्हें 50-60 रुपये सस्ते दाम पर सीमेंट दिला देंगे। अगले दिन तीनों भाई और उनके साथ रविंद्र की पत्नी क्षमा, जितेंद्र का पुत्र कर्ण मित्तल भी साथ थे। देव गर्ग के घर पहुंचे जगदीश सिंह ने विश्वास करके दस लाख रुपये का चेक चतरसेन को सौंप दिया। 30 मई को चेक क्लीयर भी हो गया, लेकिन सीमेंट की आने के कारण मकान निर्माण शुरू नहीं हो सका। काफी चक्कर काटने के बाद उन्हें कुछ माह पहले उन्हें सूचना मिली कि रविंद्र, जितेंद्र, क्षमा और रविंद्र के पुत्र चुन्नू ने गंगनहर में कूदकर आत्महत्या कर ली है। रिटायर्ड जगदीश सिंह का कहना है कि इसके बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

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रिटायर्ड सीओ ने बताया कि कुछ दिन पहले दोस्त देव गर्ग ने उन्हें बताया कि गंगनहर में कूदने से केवल रविंद्र की मौत हुई थी। उसके यहां से जो सुसाइड नोट मिला था, वह फर्जी है। शेष तीन आरोपी छिपे हुए हैं, ताकि रुपया नहीं लौटाना पड़े। सीओ सिविल लाइन हरिमोहन सिंह ने बताया कि रिटायर्ड सीओ ने एसएसपी से शिकायत की थी, उन्हीं के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।