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चंद्रशेखर क्यों लड़ना चाहते हैं हस्तिनापुर सीट से चुनाव? जानें क्या है वजह

Chandrashekhar Ravan Hastinapur seat : आजाद समाज पार्टी(कांशीराम) के संस्थापक चंद्रशेखर रावण मेरठ की हस्तिनापुर विधानसभा से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। जानिए पूरा विश्लेषण...।

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क्या चंद्रशेखर रावण लड़ेंगे हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव, PC- Patrika

मेरठ : आजाद समाज पार्टी(कांशीराम) के संस्थापक चंद्रशेखर रावण मेरठ की हस्तिनापुर विधानसभा से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। मौजूदा समय में वह नगीना लोकसभा सीट से सांसद हैं। चंद्रशेखर इस सीट से क्यों लड़ना चाहते हैं? इसी सीट के क्या मायने हैं, आइए आंकड़ों के साथ जानते हैं।

मेरठ की हस्तिनापुर सीट आरक्षित सीट(SC) है। वर्तमान में यहां से योगी सरकार में राज्यमंत्री दिनेश खटीक इस सीट से विधायक हैं। वह इस विधानसभा सीट से दूसरी बार चुनाव जीते हैं। लेकिन, तीसरी बार चुनाव लड़ने से उन्होंने हाथ खड़े कर दिए हैं। दिनेश खटीक का कहना है कि हस्तिनापुर सीट श्रापित सीट है। इस सीट से कोई भी दूसरी बार विधायक नहीं बना। इसीलिए वह अब तीसरी बार यहां से नहीं लड़ना चाहते। उन्होंने आगे कहा कि इसका वेदों और ग्रंथों में उल्लेख है। उनका मन यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ने के लिए गवाही नहीं दे रहा है।

क्या वोट बैंक बन रहा वजह?

सत्ता के गलियारों में यह भी चर्चा है कि दिनेश खटीक के पांव सियासी संतुलन बिगड़ने से डगमगाए हैं। क्योंकि यह सीट दलित और मुस्लिम बाहुल्य है। इस सीट पर लगभग 1 लाख मुस्लिम वोटर हैं। जो सियासी हवा तय करते हैं। वहीं इस सीट पर गुर्जर और दलित मतदाता लगभग बराबर हैं। लेकिन, इस बार गुर्जर बीजेपी से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। गुर्जर, दलित और अन्य जातियों के वोट पाकर भाजपा यहां से जीतती आई है। लेकिन, गुर्जर समाज के बीजेपी के साथ न आने से यहां समीकरण लड़खड़ा रहे हैं।

चंद्रशेखर क्यों दिखा रहे दिलचस्पी?

चर्चा यह भी है कि इस सीट से जिस पार्टी का विधायक बनता है। उसी की पार्टी यूपी में सरकार बनाती है। अब बात करते हैं सियासी समीकरणों की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर रावण की मुस्लिम समाज में अच्छी पैठ है। उनके मौलानाओं से अच्छे संपर्क हैं। मौलाना अरशद मदनी से लेकर मौलाना सज्जाद नोमानी तक के रिश्ते हर कोई जानता है। दूसरी बात चंद्रशेखर और औवैसी की पार्टी (AIMIM) के गठबंधन की बात भी सामने आ रही है।

दलित और मुस्लिम मतदाता कर सकते हैं नैय्या पार

मुस्लिम और दलित मतदाता बाहुल्य सीट होने से यहां चंद्रशेखर रावण को सफलता मिल सकती है। बता दें कि जिस समाज से चंद्रशेखर आते हैं वहीं जाटव समाज यहां पर बाहुल्य है। अगर समीकरण सही बैठे तो चंद्रशेखर इस सीट पर बाजी मार सकते हैं।

पार्टी की ओर से नहीं आया कोई अधिकारिक बयान

हलांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। चंद्रशेखर लगातार कहते आए हैं कि पार्टी जो निर्णय लेगी, वही सर्वमान्य होगा। पार्टी जहां से कहेगी वह वहीं से चुनाव लडेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता हस्तिनापुर में काफी एक्टिव हैं। वह जगह-जगह पोस्टर लगा रहे हैं और नुक्कड़ सभाएं की कर रहे हैं।