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मेरठ की कुरैशियान मस्जिद की इस विशेषता को जानकर आप हो जाएंगे हैरान

19वीं सदी में बनी इस मस्जिद का इतिहास है रोचक  

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मेरठ की कुरैशियान मस्जिद की इस विशेषता को जानकर आप हो जाएंगे हैरान

मेरठ। क्रांतिकारियों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध मेरठ जिला सिर्फ आजादी के इतिहास को ही अपने में नहीं समेटे है। यहां पर और भी ऐसे एतिहासिक धरोहर है कि उनके बारे में जानकार आप हैरान हो जाएंगे। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहर में से एक है मस्जिद कुरैशियान। जो अपने आप में इस्लामी स्थापत्य का नमूना है। 19वीं सदी में बनी इस मस्जिद का इतिहास भी बड़ा रोचक रहा है। कभी इस मस्जिद के चारों और बाग, खेत और जंगल होते थे। दूर-दूर से लोग यहां पानी लेने और नमाज पढ़ने के लिए आते थे। जिस जगह मस्जिद स्थापित है उससे कुछ किलोमीटर दूरी पर मेरठ का लिसाड़ी गांव होता था, जो आज शहर का ही हिस्सा बन गया है।

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बड़ी संख्या में आते थे नमाज के लिए

लिसाड़ी गांव के आसपास मस्जिद न होने पर वहां से बड़ी संख्या में लोग मस्जिद कुरैशियान में नमाज अदा करने आते थे। मस्जिद के अब्दुल वहाब ने बताया कि मस्जिद के मेहराब और गुंबद की नक्काशी बेजोड़ है। मेरठ की जामा मस्जिद में जो कारीगरी की गई है उसके बाद इस कुरैशियान मस्जिद का नंबर आता है। इस मस्जिद के मेहराब और मिंबर की बनावट अद्भुत है। मस्जिद इस्लाम की स्थापत्य कला का प्रशंसनीय और बेजोड़ उदाहरण है। इसके शिखर और छज्जे नक्काशीदार है। जो उस जमाने में ही पेपरमैशी नामक लकड़ी से सुसज्जित किए गए हैं।

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पिलर पर बनाई गई पूरी मस्जिद

मस्जिद की सबसे अहम खासियत यह है कि यह पिलर पर बनाई गई है। मस्जिद के नीचे रहने के लिए घर बनाए गए थे और उसके ऊपर पूरी मस्जिद बनाई गई थी। मस्जिद के चारों ओर बाहर की तरफ बड़े-बड़े खाने बनाए गए थे, जो आज पूरी तरह से दुकान का रूप ले चुके हैं। इन दुकानों का जो किराया आता है उसी से मस्जिद की देखभाल और मरम्मत होती है।

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